
केदारनाथ धाम के लिए संचालित हेली सेवा इस वर्ष मानसून शुरू होने से पहले ही सुरक्षा कारणों से बंद कर दी गई है। डीजीसीए ने 25 जून के बाद संचालन की अनुमति नहीं दी, जिसके चलते अब सितंबर में मानसून समाप्त होने के बाद ही हेलीकॉप्टर सेवाएं दोबारा शुरू की जाएंगी।
- कारगी कूड़ा निस्तारण स्थल पर एनएचआरसी ने मांगी कार्रवाई रिपोर्ट
- स्वास्थ्य खतरे की शिकायत पर मानवाधिकार आयोग ने लिया संज्ञान
- देहरादून के डंपिंग ग्राउंड को शहर से बाहर शिफ्ट करने की उठी मांग
- चार सप्ताह में जवाब दें, एनएचआरसी ने जिला प्रशासन को दिए निर्देश
मनीष गुप्ता
इंद्रा एन्क्लेव, मेहूवाला, देहरादून
देहरादून। देहरादून के कारगी क्षेत्र में स्थित नगर निगम के कूड़ा डंपिंग ग्राउंड से उत्पन्न हो रहे कथित स्वास्थ्य एवं पर्यावरणीय खतरों के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने संज्ञान लिया है। आयोग ने देहरादून के जिलाधिकारी को शिकायत की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने तथा चार सप्ताह के भीतर विस्तृत कार्रवाई प्रतिवेदन (एक्शन टेकन रिपोर्ट-एटीआर) आयोग को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि रिपोर्ट अंग्रेजी में अनुवादित होकर निर्धारित समय सीमा के भीतर प्रस्तुत की जाए।
यह कार्रवाई देहरादून निवासी मनीष गुप्ता की ओर से दायर शिकायत के आधार पर की गई है। शिकायत में कहा गया है कि कारगी क्षेत्र में स्थित नगर निगम का कूड़ा डंपिंग ग्राउंड बलूनी स्कूल तथा संत निरंकारी समागम स्थल के बेहद निकट स्थित है। यहां प्रतिदिन बड़ी मात्रा में नगर का ठोस कचरा डाला जाता है, जिससे आसपास के क्षेत्रों में दुर्गंध, प्रदूषण और संक्रमण फैलने की आशंका बनी रहती है। शिकायतकर्ता का कहना है कि इससे स्थानीय निवासियों, विद्यार्थियों तथा धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रमों में आने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
शिकायत में उत्तराखंड सरकार को निर्देश जारी कर डंपिंग ग्राउंड को शहर की सीमा से बाहर किसी उपयुक्त स्थान पर स्थानांतरित करने की मांग की गई है। शिकायतकर्ता का तर्क है कि आबादी के बीच स्थित कूड़ा निस्तारण स्थल सार्वजनिक स्वास्थ्य, स्वच्छ पर्यावरण और मानवाधिकारों के लिए गंभीर चुनौती बन गया है। आयोग ने अपने आदेश में कहा है कि शिकायत की प्रति ऑनलाइन माध्यम से देहरादून के जिलाधिकारी को भेजी जाए ताकि मामले में आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
साथ ही निर्देश दिए गए हैं कि जांच के बाद की गई कार्रवाई का विस्तृत प्रतिवेदन चार सप्ताह के भीतर आयोग को उपलब्ध कराया जाए। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि सभी सरकारी विभाग इस मामले में अपना जवाब केवल एचआरसीनेट पोर्टल के माध्यम से ही प्रस्तुत करें। ईमेल से भेजी गई रिपोर्ट स्वीकार नहीं की जाएगी। अब इस मामले में जिला प्रशासन को शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच करनी होगी। यदि जांच में स्वास्थ्य एवं पर्यावरण संबंधी खतरे सामने आते हैं तो नगर निगम और संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर आवश्यक कदम उठाने होंगे।
आयोग की ओर से मांगी गई रिपोर्ट के बाद यह स्पष्ट होगा कि जिला प्रशासन डंपिंग ग्राउंड के संचालन, प्रदूषण नियंत्रण और संभावित स्थानांतरण के संबंध में क्या कार्रवाई करता है। कारगी डंपिंग ग्राउंड को लेकर स्थानीय स्तर पर समय-समय पर विरोध और शिकायतें सामने आती रही हैं। आसपास के लोग लंबे समय से दुर्गंध, प्रदूषण, मच्छरों की बढ़ती संख्या तथा पर्यावरणीय समस्याओं को लेकर चिंता जताते रहे हैं। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के संज्ञान लेने के बाद अब इस मामले में जिला प्रशासन की कार्रवाई और आयोग को भेजी जाने वाली रिपोर्ट पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।





