
रामनगर के चौपड़ा गांव में पानी भरने गई एक महिला पर बाघ ने अचानक हमला कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई। साथ मौजूद महिलाओं के शोर मचाने पर बाघ जंगल की ओर भाग गया और महिला की जान बच गई। घटना के बाद ग्रामीणों में दहशत है और वन विभाग से बाघ को पकड़ने की मांग की जा रही है।
- रामनगर में बाघ का आतंक, महिलाओं की सूझबूझ से बची जान
- पानी भरने गई महिला पर झपटा बाघ, ग्रामीणों में दहशत
- चीख-पुकार सुन दौड़ीं महिलाएं, शोर मचाकर बाघ को खदेड़ा
- वन विभाग से पिंजरा लगाने की मांग, इलाके में बढ़ाई गई गश्त
रामनगर। नैनीताल जिले के रामनगर क्षेत्र में बाघ का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। मंगलवार को ग्राम चौपड़ा में एक महिला पर बाघ के हमले से पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल बन गया। घर से महज 20 मीटर दूर पानी भरने गई महिला पर झाड़ियों में छिपे बाघ ने अचानक हमला कर दिया। महिला की चीख-पुकार और साथ मौजूद अन्य महिलाओं की सतर्कता के चलते उसकी जान बच गई, लेकिन वह गंभीर रूप से घायल हो गई। जानकारी के अनुसार ग्राम चौपड़ा निवासी 42 वर्षीय उमा देवी पत्नी भुवन चंद मंगलवार दोपहर करीब साढ़े तीन बजे गांव की अन्य तीन महिलाओं के साथ घर के पीछे स्थित पानी की टंकी से पानी भरने गई थीं। बताया जा रहा है कि पानी भरने के दौरान पास की झाड़ियों में छिपा बाघ अचानक बाहर निकला और पीछे से उमा देवी पर हमला कर दिया। हमले से महिला जमीन पर गिर गई और जोर-जोर से चिल्लाने लगी।
महिला की चीख सुनकर साथ मौजूद अन्य महिलाओं ने साहस दिखाते हुए शोर मचाना शुरू कर दिया। महिलाओं के हल्ला करने और आसपास लोगों के जुटने की आहट से बाघ घबराकर जंगल की ओर भाग गया। यदि अन्य महिलाएं समय रहते शोर नहीं मचातीं तो घटना और भी भयावह हो सकती थी। घटना के बाद घायल उमा देवी को परिजन तत्काल रामनगर के सरकारी अस्पताल लेकर पहुंचे। चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए हायर सेंटर रेफर कर दिया। डॉक्टरों के अनुसार महिला के गले, चेहरे और कमर पर बाघ के पंजों और दांतों के गहरे निशान पाए गए हैं।
घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग के अधिकारी भी सक्रिय हो गए। रामनगर वन प्रभाग के एसडीओ अंकित बडोला अस्पताल पहुंचे और घायल महिला का हालचाल जाना। उन्होंने परिजनों को हरसंभव सहायता का आश्वासन देते हुए बताया कि घटनास्थल के आसपास वन कर्मियों की गश्त बढ़ा दी गई है। साथ ही बाघ को पकड़ने के लिए उच्च अधिकारियों से पिंजरा लगाने की अनुमति मांगी जा रही है। इस घटना के बाद चौपड़ा गांव और आसपास के क्षेत्रों में भय का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि बाघ की गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं और लोगों का घरों से बाहर निकलना भी मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों ने वन विभाग से तत्काल कार्रवाई करते हुए आदमखोर प्रवृत्ति के इस बाघ को पकड़ने की मांग की है।
गौरतलब है कि इस वर्ष रामनगर क्षेत्र में बाघ के हमलों की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। दो जनवरी 2026 को कॉर्बेट टाइगर रिजर्व की ढेला रेंज में लकड़ी बीनने गई 65 वर्षीय सुखिया देवी की बाघ के हमले में मौत हो गई थी। इसके बाद चार जनवरी को कोटा रेंज में एक श्रमिक अभिमन्यु को बाघ ने मार डाला था। वहीं 18 जनवरी को कोसी रेंज क्षेत्र में एक अज्ञात व्यक्ति भी बाघ का शिकार बन गया था। लगातार बढ़ रही घटनाओं ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जंगल से सटे गांवों में बाघों की आवाजाही बढ़ने के बावजूद प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, जिसके कारण लोगों की जान जोखिम में पड़ रही है।
वन विभाग ने फिलहाल लोगों से सतर्क रहने, अकेले जंगल या सुनसान स्थानों पर न जाने तथा समूह में आवाजाही करने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि बाघ की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और जल्द ही उसे पकड़ने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।





