
देहरादून के पैनेसिया अस्पताल के ICU में लगी भीषण आग ने एक महिला की जान ले ली, जबकि कई मरीज गंभीर रूप से झुलस गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आग और धुएं के बीच मरीजों को बेहद मुश्किल हालात में बाहर निकाला गया। घटना के बाद अस्पताल प्रबंधन की सुरक्षा व्यवस्था और आपदा तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
- ICU में लगी आग से मचा हड़कंप, कई मरीजों की हालत गंभीर
- धुएं और लपटों के बीच चला रेस्क्यू, स्ट्रेचर तक नहीं मिला
- एसी में शॉर्ट सर्किट से भड़की आग, अस्पताल प्रबंधन पर उठे सवाल
- चादरों में लपेटकर निकाले गए मरीज, एंबुलेंस तक में लगी आग
देहरादून: राजधानी देहरादून स्थित पैनेसिया अस्पताल में लगी भीषण आग ने बुधवार सुबह भयावह त्रासदी का रूप ले लिया। अस्पताल के ICU में अचानक भड़की आग और धुएं ने मरीजों, तीमारदारों और स्टाफ के बीच अफरा-तफरी मचा दी। इस दर्दनाक हादसे में 60 वर्षीय वीरवती की मौत हो गई, जबकि 16 अन्य लोग झुलसने और धुएं की चपेट में आने के कारण उपचाराधीन हैं। इनमें से चार मरीजों की हालत बेहद गंभीर बताई जा रही है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक आग इतनी तेजी से फैली कि ICU के भीतर मौजूद मरीजों को संभलने तक का मौका नहीं मिला।
चारों ओर धुआं भर गया और कुछ ही मिनटों में हालात बेकाबू हो गए। मृतका वीरवती के बेटे कमल ने बताया कि उनकी मां दो दिन पहले गिरने के कारण घायल हो गई थीं और शुगर की समस्या के चलते उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था। कमल ने बताया कि सुबह अचानक ICU के बाहर धुआं दिखाई दिया। देखते ही देखते अंदर आग की लपटें फैलने लगीं। जिस बेड पर उनकी मां भर्ती थीं, उसके आसपास आग पहुंच चुकी थी। वह अपनी मां को बचाने के लिए बेबस होकर बाहर खड़े रहे, क्योंकि धुएं और आग के कारण अंदर जाना संभव नहीं था। उनकी मां दर्द से चिल्लाती रहीं, लेकिन राहत दल के पहुंचने तक उनकी सांसें थम चुकी थीं।
घटना के दौरान अस्पताल में अव्यवस्था का आलम साफ दिखाई दिया। कई मरीजों को बाहर निकालने के लिए स्ट्रेचर तक उपलब्ध नहीं हो सके। राहत एवं बचाव दल को मरीजों को चादरों और बेडशीट में लपेटकर नीचे लाना पड़ा। कुछ तीमारदार अपने परिजनों को गोद में उठाकर अस्पताल से बाहर भागते नजर आए। कई मरीजों की चादरों तक में आग लगी हुई थी। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि ICU में भर्ती मरीजों को अचानक ऑक्सीजन और वेंटिलेटर सपोर्ट से हटाना पड़ा, जिससे उनकी हालत और बिगड़ गई। धुएं के कारण मरीजों को सांस लेने में भारी दिक्कत हुई। चिकित्सकों के अनुसार एसी की गैस और धुएं ने मरीजों के फेफड़ों को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।
घटना के बाद घायलों को दूसरे अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस भेजी गईं, लेकिन एक एंबुलेंस में भी आग भड़क उठी। बताया जा रहा है कि मरीज को जिस चादर में लपेटकर लाया गया था, उसमें आग की चिंगारी सुलग रही थी। अस्पताल पहुंचते ही आग तेज हो गई। हालांकि फायर कर्मियों ने समय रहते आग पर काबू पा लिया और बड़ा हादसा टल गया। अस्पताल परिसर में बिखरी चप्पलें, टूटे बेड और अस्त-व्यस्त खिड़कियां हादसे की भयावहता बयां कर रही थीं। मरीजों को सीढ़ियों के रास्ते जल्दबाजी में बाहर निकाला गया। कई लोग बदहवास हालत में अपने परिजनों को ढूंढते नजर आए।
प्रारंभिक जांच में आग लगने का कारण ICU के एसी में शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है। घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्थाओं की जांच शुरू कर दी है। वहीं, अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही और अग्नि सुरक्षा इंतजामों को लेकर भी गंभीर सवाल उठने लगे हैं।





