
एसएससी ऑनलाइन परीक्षा में नकल के मामले में उत्तराखंड एसटीएफ की जांच में बड़े खुलासे हुए हैं। जांच में सामने आया है कि देशभर की सैकड़ों परीक्षा लैब में सेटअप के दौरान ऐसी तकनीकी सेटिंग की गई, जिससे रिमोट एक्सेस के जरिए नकल कराई जा सके। मामले में परीक्षा आयोजित कराने वाली कंपनी के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत की भी आशंका जताई जा रही है।
- ऑनलाइन परीक्षा सिस्टम में सेंध, 100 से ज्यादा लैब संदिग्ध
- लैब सेटअप के दौरान ही की गई थी नकल की सेटिंग
- एसएससी परीक्षा में सीसीटीवी और सर्वर तक पहुंच बना रहे थे गिरोह
- STF जांच में भर्ती परीक्षा माफिया के नेटवर्क का खुलासा
देहरादून: देशभर में आयोजित होने वाली एसएससी ऑनलाइन परीक्षाओं की पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। उत्तराखंड एसटीएफ की जांच में ऐसे चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं, जिन्होंने भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता को कटघरे में ला दिया है। जांच में पता चला है कि कई परीक्षा लैब में सेटअप के दौरान ही ऐसी तकनीकी छेड़छाड़ की गई थी, जिससे रिमोट एक्सेस के जरिए आसानी से नकल कराई जा सके। एसटीएफ के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क में देशभर की सैकड़ों लैब संदेह के घेरे में हैं। शुरुआती जांच में यह भी आशंका जताई गई है कि परीक्षा आयोजित कराने वाली कंपनी के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से यह गोरखधंधा लंबे समय से चल रहा था। गिरोह तकनीकी सेटिंग के जरिए कंप्यूटर सिस्टम, सर्वर और यहां तक कि सीसीटीवी फीड तक पर नियंत्रण हासिल कर लेता था।
दरअसल, फरवरी माह में देहरादून स्थित एमकेपी क्षेत्र में संचालित “महादेव डिजिटल जोन” नामक लैब में एसएससी परीक्षा के दौरान गड़बड़ी का मामला सामने आया था। इसके बाद एसटीएफ ने कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। जांच आगे बढ़ी तो इस नेटवर्क के तार कई राज्यों तक जुड़े मिले। सूत्रों के अनुसार, हाल ही में गिरफ्तार आरोपी ईश्वरी प्रसाद ने पूछताछ में कई अहम खुलासे किए हैं। उसने बताया कि वर्ष 2024 में योगेश उर्फ योगी उर्फ इंद्रजीत उर्फ जैक नामक व्यक्ति के कहने पर उसने परीक्षा लैब सेटअप का काम शुरू किया था। बदले में उसे मुनाफे का 30 प्रतिशत हिस्सा देने का लालच दिया गया। इसके बाद उसने “महादेव डिजिटल जोन” नाम से लैब स्थापित की।
जांच में सामने आया कि आरोपी उत्तराखंड के अलावा दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हैदराबाद, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश में 500 से अधिक लैब स्थापित कर चुका है। हालांकि, इनमें से कुछ चुनिंदा लैब में ही तकनीकी सेटिंग कर नकल का सिस्टम तैयार किया गया था। ऐसे संदिग्ध लैब की संख्या 100 से अधिक बताई जा रही है। एसटीएफ अधिकारियों के मुताबिक, लैब सेटअप के दौरान इथरनेट केबल को यूपीएस सर्वर रूम के विशेष चेंबर से जोड़ा जाता था। इसके जरिए गिरोह के लोग परीक्षा केंद्र के सिस्टम तक रिमोट एक्सेस हासिल कर लेते थे। परीक्षा के दौरान स्क्रीन पर प्रश्न तो परीक्षार्थी देखता था, लेकिन उत्तर बाहर बैठे लोग दर्ज करते थे। यानी पूरा सिस्टम बाहरी नेटवर्क से नियंत्रित किया जाता था।
इतना ही नहीं, जांच में यह भी सामने आया कि सीसीटीवी कैमरों की लाइव फीड पर भी गिरोह का नियंत्रण रहता था। सर्वर रूम में अतिरिक्त केबलिंग कर कैमरों की फीड को अपने हिसाब से संचालित किया जाता था। जरूरत पड़ने पर कैमरे बंद कर दिए जाते थे या फुटेज में तकनीकी गड़बड़ी कर दी जाती थी, ताकि नकल का पूरा खेल पकड़ में न आए। एसटीएफ को आशंका है कि इस रैकेट में कई तकनीकी विशेषज्ञ और अन्य लोग भी शामिल हैं। फिलहाल मामले में कई संदिग्धों की तलाश की जा रही है। आगामी परीक्षाओं में गड़बड़ी की आशंका को देखते हुए पुलिस ने एक परीक्षा केंद्र को बंद भी करा दिया है।
भर्ती परीक्षाओं में हाईटेक तकनीक के जरिए की जा रही इस तरह की धांधली ने अभ्यर्थियों के बीच चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि परीक्षा केंद्रों की तकनीकी ऑडिट और निगरानी मजबूत नहीं की गई तो भविष्य में भी इस तरह के संगठित साइबर-नकल गिरोह युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करते रहेंगे।





