
उत्तराखंड एसटीएफ ने एसआईआर और जनगणना प्रक्रिया के दौरान साइबर ठगी की आशंका को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। सोशल मीडिया पर फर्जी जनगणना अधिकारियों के नाम पर निजी जानकारी जुटाने के संदेश वायरल हो रहे हैं। एसटीएफ ने स्पष्ट किया कि असली अधिकारी कभी भी बैंक डिटेल, ओटीपी या वित्तीय जानकारी नहीं मांगते।
- जनगणना सर्वे के नाम पर ठग सक्रिय, लोगों को सतर्क रहने की सलाह
- एसटीएफ बोली- ओटीपी और बैंक डिटेल मांगने वालों से रहें सावधान
- सोशल मीडिया पर वायरल संदेशों के बीच STF ने जारी किया साइबर अलर्ट
- बुजुर्गों को बनाया जा सकता है निशाना, साइबर अपराधियों से सावधान रहने की अपील
देहरादून: उत्तराखंड में एसआईआर प्रक्रिया और आगामी जनगणना को लेकर साइबर अपराधियों के सक्रिय होने की आशंका के बीच स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने लोगों के लिए विशेष अलर्ट जारी किया है। एसटीएफ ने नागरिकों से अपील की है कि वे जनगणना अधिकारी या सर्वे टीम के नाम पर आने वाले फर्जी कॉल, मैसेज, मोबाइल लिंक और संदिग्ध व्यक्तियों से सावधान रहें। एसटीएफ एसएसपी अजय सिंह ने कहा कि सोशल मीडिया और व्हाट्सएप पर कई तरह के संदेश तेजी से वायरल हो रहे हैं।
इन संदेशों में दावा किया जा रहा है कि कुछ लोग जनगणना अधिकारी बनकर घर-घर पहुंच रहे हैं और लोगों की निजी जानकारी एकत्र कर साइबर ठगी या चोरी की घटनाओं को अंजाम दे सकते हैं। हालांकि कुछ संदेश भ्रामक भी हो सकते हैं, लेकिन साइबर अपराधी अक्सर इसी प्रकार के तरीकों का इस्तेमाल कर लोगों को जाल में फंसाते हैं। एसटीएफ ने स्पष्ट किया कि वास्तविक जनगणना अधिकारी कभी भी किसी नागरिक से बैंक खाते की जानकारी, एटीएम कार्ड नंबर, ओटीपी, पासवर्ड या अन्य वित्तीय जानकारी नहीं मांगते।
यदि कोई व्यक्ति इस प्रकार की जानकारी मांगता है तो उसे तुरंत संदिग्ध मानते हुए सतर्क हो जाना चाहिए। अधिकारियों ने कहा कि किसी भी सर्वे कर्मचारी को जानकारी देने से पहले उसका अधिकृत पहचान पत्र अवश्य जांचें। एसटीएफ ने यह भी साफ किया कि जनगणना प्रक्रिया में आधार कार्ड या पैन कार्ड की फोटोकॉपी जमा कराने की आवश्यकता नहीं होती और न ही किसी प्रकार का शुल्क लिया जाता है। साइबर ठग फर्जी वेबसाइट, मोबाइल एप, संदिग्ध लिंक और नकली सर्वे फॉर्म के जरिए लोगों की निजी जानकारी चुराने की कोशिश कर सकते हैं।
विशेष रूप से बुजुर्गों को सावधान रहने की सलाह दी गई है, क्योंकि साइबर अपराधी अक्सर उन्हें आसान निशाना बनाते हैं। एसटीएफ का कहना है कि अपराधी फोन कॉल या घर पहुंचकर सरकारी अधिकारी बनकर लोगों को भ्रमित कर सकते हैं। ऐसे में बिना पुष्टि किसी को भी व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें। लोगों को जागरूक करने के लिए राज्यभर में साइबर सुरक्षा अभियान भी चलाए जा रहे हैं। एसटीएफ ने अपील की है कि यदि किसी व्यक्ति को संदिग्ध कॉल, मैसेज, लिंक या फर्जी सर्वे टीम दिखाई दे तो इसकी जानकारी तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर दें। अधिकारियों ने कहा कि जागरूकता और सतर्कता ही साइबर अपराध से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।





