
देहरादून में Harish Rawat ने कहा कि दल-बदल की राजनीति राज्य में अस्थिरता पैदा कर रही है और इससे जनहित के मुद्दे पीछे छूट जाते हैं। उन्होंने चुनाव से दूरी बनाने को पार्टी में स्पष्ट नेतृत्व स्थापित करने की रणनीति बताया। साथ ही उन्होंने युवाओं को राजनीति में अधिक अवसर देने की आवश्यकता पर जोर दिया।
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देहरादून: उत्तराखंड की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री Harish Rawat ने स्पष्ट रूप से कहा है कि दल-बदल की बढ़ती प्रवृत्ति राज्य के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है। एक विशेष बातचीत में उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी समय में दूसरे दलों में तोड़फोड़ की शुरुआत भाजपा ने की, जो अब एक स्थापित राजनीतिक रणनीति बनती जा रही है। रावत ने कहा कि इस तरह की राजनीति से न केवल लोकतांत्रिक मूल्यों को ठेस पहुंचती है, बल्कि इससे जनता के वास्तविक मुद्दे भी पीछे छूट जाते हैं।
उनका मानना है कि दल-बदल के कारण सरकारों में अस्थिरता आती है, जिसका सीधा असर राज्य के विकास और नीतिगत फैसलों पर पड़ता है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि स्वयं उन्होंने भी दल-बदल के प्रभाव को झेला और इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़नी पड़ी। चुनाव से दूरी बनाए रखने के अपने निर्णय पर उन्होंने कहा कि यह कदम उन्होंने पार्टी में स्पष्ट नेतृत्व स्थापित करने के उद्देश्य से उठाया है। उनके अनुसार, यदि हर बार वही चेहरे आगे रहते हैं तो नए नेतृत्व को उभरने का अवसर नहीं मिल पाता।
उन्होंने खुद को पार्टी के लिए एक मार्गदर्शक की भूमिका में बताते हुए कहा कि वह संगठन को मजबूत करने और नए नेताओं को आगे लाने के लिए काम करना चाहते हैं। रावत ने कांग्रेस की तैयारियों का जिक्र करते हुए कहा कि पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मिलकर आगामी चुनावों के लिए रणनीति बना रहे हैं और सामूहिक नेतृत्व के जरिए मजबूत विकल्प प्रस्तुत करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने युवाओं की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि राज्य में प्रतिभाशाली युवाओं की कमी नहीं है, लेकिन उन्हें राजनीति में निखरने के पर्याप्त अवसर नहीं मिल रहे हैं, जो चिंता का विषय है।
इसके साथ ही उन्होंने अपने राजनीतिक अनुभव को आने वाली पीढ़ियों के लिए संजोने की इच्छा जताई। उनका कहना है कि सक्रिय राजनीति से थोड़ा हटकर वह अपने अनुभवों को लिपिबद्ध करना चाहते हैं, ताकि भविष्य में इसका लाभ नई पीढ़ी को मिल सके। रावत ने यह भी स्पष्ट किया कि उनके मन में कभी राजनीतिक विरासत को लेकर कोई व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा नहीं रही। उन्होंने हमेशा संगठन और कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता दी है और आगे भी इसी सोच के साथ काम करते रहेंगे।







