
उत्तराखंड सरकार अटल उत्कृष्ट विद्यालयों के लिए अलग नियमावली बनाने जा रही है। इस नई व्यवस्था से शिक्षकों की तैनाती और तबादलों पर असर पड़ेगा। दुर्गम क्षेत्रों में सेवाओं को विशेष महत्व देने के साथ नई नीति में बदलाव की तैयारी है।
- दुर्गम सेवा को मिलेगा अतिरिक्त लाभ
- शिक्षकों के लिए बदलेगी तैनाती व्यवस्था
- पांच साल की तैनाती नियम में बदलाव संभव
- नई नीति से शिक्षकों में असंतोष के संकेत
देहरादून। उत्तराखंड सरकार राज्य के Atal Utkrisht Vidyalaya (अटल उत्कृष्ट विद्यालयों) के लिए अलग नियमावली तैयार करने जा रही है, जिससे इन विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों और कर्मचारियों की तैनाती व तबादला व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं। शिक्षा मंत्री Dhan Singh Rawat के अनुसार नई नियमावली के लागू होने के बाद इन स्कूलों के शिक्षक तबादलों की जद में आएंगे और वर्तमान व्यवस्था में मौजूद विसंगतियों को दूर किया जाएगा।
दरअसल, राज्य में वर्ष 2020-21 के दौरान कई राजकीय इंटर कॉलेजों को सीबीएसई बोर्ड से संबद्ध कर अटल उत्कृष्ट विद्यालयों के रूप में विकसित किया गया था। इन स्कूलों में शिक्षकों और प्रधानाचार्यों का चयन स्क्रीनिंग प्रक्रिया के माध्यम से किया गया और उनकी तैनाती पांच वर्ष के लिए निर्धारित की गई थी। मौजूदा व्यवस्था के तहत चयनित शिक्षकों और कर्मचारियों को प्रोत्साहन देने के लिए सेवा गणना में विशेष प्रावधान किए गए हैं।
इसमें दुर्गम क्षेत्रों में तैनात शिक्षकों की एक वर्ष की सेवा को दो वर्ष के बराबर माना जाता है, जबकि सुगम क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षकों की सेवाओं को दुर्गम क्षेत्र में जोड़ा जाता रहा है। हालांकि इस व्यवस्था के कारण दोहरी नीति की स्थिति बन गई है। एक ओर पहले से तैनात शिक्षकों की सेवाएं सुगम क्षेत्र में जोड़ी जा रही हैं, वहीं चयनित होकर आए शिक्षकों की सेवाओं को दुर्गम क्षेत्र के रूप में गिना जा रहा है।
इससे शिक्षकों के बीच असंतोष की स्थिति उत्पन्न हो गई है और कई मामलों में तबादलों की प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है। नई नियमावली के तहत इन विसंगतियों को दूर करने की तैयारी है। सरकार का उद्देश्य तैनाती और सेवा गणना को अधिक पारदर्शी और संतुलित बनाना है, ताकि शिक्षकों के हितों की रक्षा के साथ शिक्षा व्यवस्था को भी मजबूत किया जा सके।
इसके साथ ही सरकार अटल उत्कृष्ट विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को कुछ अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकार देने पर भी विचार कर रही है, जिससे स्कूलों के संचालन में अधिक प्रभावशीलता लाई जा सके। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का मानना है कि नई नियमावली लागू होने के बाद न केवल शिक्षकों के तबादलों में स्पष्टता आएगी, बल्कि विद्यालयों की कार्यप्रणाली में भी सुधार होगा और छात्रों को बेहतर शैक्षिक वातावरण मिल सकेगा।





