
फाल्गुन महीना प्रकृति की सुंदरता, वसंत की बहार और धार्मिक आस्था का प्रतीक माना जाता है। इसी मास में महाशिवरात्रि और होली जैसे प्रमुख त्योहार आते हैं। खेतों में लहराती सरसों और उत्सवों की उमंग के साथ यह महीना समाज में प्रेम, उल्लास और सांस्कृतिक एकता का संदेश देता है।
- फाल्गुन में झूमती प्रकृति और खिलती संस्कृति
- महाशिवरात्रि और होली से सजा फाल्गुन का पावन मास
- सरसों के फूलों और उत्सवों से महकता फाल्गुन
- वसंत की बहार और आस्था का प्रतीक फाल्गुनी महीना
गणपत लाल उदय
ये फाल्गुनी महीना होता है प्रकृति के लिए सौगात,
जो प्रकृति के नज़रिये से महत्वपूर्ण धार्मिक मास।
जिसके पश्चात होता है हिन्दू नए साल का आगाज़,
हिन्दू पंचांग में साल का यही होता आख़िरी मास।।
इसी महीने में आते हैं दो लोकप्रिय बड़े ही त्योहार,
जो महाशिवरात्रि और है रंगों का ये होली त्योहार।
इस महीने से हो जाती धीरे-धीरे गर्मी की शुरुआत,
दुल्हन रूप में सजी रहती धरती वसंत की बहार।।
सम्पूर्ण वातावरण हो जाता इस माह में जैसे रंगीन,
खेतों में पीली सरसों लहराती, खिल जाती ज़मीन।
ये ढोल-नगाड़े, चंग बजाते, सभी गाते खुशी के गीत,
भेदभाव को भुलाकर संस्कृति में हो जाते हैं लीन।।
कहा जाता है चन्द्रमा की उत्पत्ति भी हुई इस मास,
गाजे-बाजे संग नाचते-गाते मनाते उत्सव उल्लास।
भक्त प्रह्लाद की रक्षा हेतु हरि-नृसिंह रूप में आएं,
अष्टमी को मां जानकी जयंती आती है इसी मास।।
विजया एकादशी के रोज़ करते सभी व्रत-उपवास,
श्री विष्णु का ध्यान करते जिनका दिल में निवास।
त्रिलोकी महापर्व फल भी उसको मिलता है अपार,
दान-पुण्य तर्पण के लिए अमावस्या दिन है ख़ास।।
सैनिक की कलम
गणपत लाल उदय, अजमेर (राजस्थान)








