
यह प्रतीकात्मक कथा सोना-चांदी के बढ़ते दामों के माध्यम से अहंकार और आम आदमी से दूरी के दुष्परिणामों को उजागर करती है। लेखक सरल संवादों में यह संदेश देते हैं कि बाजार और जीवन दोनों में संतुलन व मर्यादा ही स्थायित्व का आधार है। आमजन से जुड़ाव टूटते ही मूल्य भी अर्थहीन हो जाते हैं।
- जब घमंड आसमान छू ले और बाजार जमीन पर आ जाए
- आम आदमी से दूर होते भावों की कथा
- सोना-चांदी और सुनार की सीख
- मूल्य, मर्यादा और बाजार का यथार्थ
सुनील कुमार माथुर
सदस्य अणुव्रत लेखक मंच एवं
स्वतंत्र लेखक व पत्रकार, जोधपुर, राजस्थान
रविवार का दिन था। मैं अपने बगीचे में चाय की चुस्कियों के साथ अख़बार पढ़ रहा था। तभी सोना और चांदी टहलते हुए मेरे घर आ गए। मैंने बच्चों को आवाज़ लगाकर उनके लिए चाय मंगाई। बात-बात में मैंने उनसे पूछा कि तुम क्यों बंदर की तरह आसमान में छलांग लगा रहे हो और आम आदमी की पहुँच से दूर हो रहे हो। ज़मीन पर रहो और आम आदमी की पहुँच में रहोगे तो सुखी रहोगे, वरना एक दिन ऐसा भी आएगा कि तुम्हें पूछने वाला कोई भी नहीं होगा और सड़ी-गली सब्ज़ियों जैसा तुम्हारे भाव होंगे।
मेरी बात सोना और चांदी दोनों को ही बुरी लगी। वे उठकर चल दिए। थोड़ी ही दूर पर उन्हें एक सुनार मिल गया। उसने उनसे (सोना और चांदी से) उदासी का कारण पूछा तो वे बोले कि माथुर साहब! खुद तो सोना और चांदी खरीदते नहीं हैं और हमें भी एक कप चाय पिलाकर बहुत ही खरी-खोटी सुना दी। यह सुनकर वह सुनार बोला कि वे कलमकार हैं। उनकी लेखनी बड़े-बड़े तिसमारखा को भी धूल चटा देती है। उन्होंने तुम्हें कुछ भी कहा है तो सोच-समझकर ही कहा होगा। क्यों तुम बंदरों की तरह आसमान में छलांग लगा रहे हो? ज़मीन से जुड़े रहने में ही भलाई है। इतना कहकर सुनार वहाँ से चलता बना।
कुछ ही दिनों बाद समाचार पत्रों के मुखपृष्ठ पर ख़बर छपी—सोना-चांदी उल्टे मुँह गिरे (दामों में भारी गिरावट, 40 साल पूर्व के भाव हुए लेकिन ख़रीदार कोई नहीं है)। यह सुनकर वह कलमकार तुरंत अस्पताल पहुँचा और उन्हें नारंगी का जूस पिलाया और कहा कि मैंने तुम्हें पहले ही कहा था कि आम आदमी के साथ रहो, लेकिन तुमने एक न सुनी और आज तुम्हारी जो हालत है, वह तुम्हारे ही अहंकार के कारण है।
बस अपनी मर्यादा में रहो। सबके साथ रहो। सबका साथ ही आदर्श जीवन का आधार है। जो हवा में बातें करते हैं, अहंकार में डूबे रहते हैं, उनका एक न एक दिन यही हाल होता है। अतः अपना दाम घटाने वाली एक गोली लो और यह जूस पियो। जैसे-जैसे तुम अपना दाम घटाते रहोगे, त्यों-त्यों जनता-जनार्दन आपका संग पहले जैसा करने लगेगी। आगे आपकी मर्ज़ी। फिर न कहना कि मुझे समय रहते किसी ने कोई सही राय नहीं दी।







Right 👍
Nice