
एमडीडीए द्वारा ध्वस्तीकरण नोटिस जारी किए जाने के बाद देहरादून की तरला नागल और ढाकपट्टी बस्तियों में दहशत का माहौल है। बस्तीवासियों ने नगर निगम पहुंचकर महापौर से हस्तक्षेप की मांग की, जिस पर अधिकारियों से वार्ता का आश्वासन दिया गया।
- एमडीडीए के नोटिस के बाद नगर निगम पहुंचे तरला नागल व ढाकपट्टी के निवासी
- बस्तियों पर बुलडोजर की आशंका, महापौर ने दिया वार्ता का आश्वासन
- सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी के आदेशों के बाद तेज हुई कार्रवाई
- 2016 से पहले बसे पात्र परिवारों को मिलेगा पुनर्वास, अवैध निर्माण होंगे ध्वस्त
देहरादून| देहरादून में मसूरी–देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) की ओर से ध्वस्तीकरण के नोटिस जारी किए जाने के बाद तरला नागल और ढाकपट्टी बस्तियों में हड़कंप मच गया है। बस्तीवासियों को अपने घर उजड़ने का डर सता रहा है। इसी आशंका के चलते बुधवार को बड़ी संख्या में निवासी नगर निगम कार्यालय पहुंचे और महापौर से मदद की गुहार लगाई। नगर निगम परिसर में विभिन्न विपक्षी दलों के नेताओं की अगुआई में बस्तीवासियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और आरोप लगाया कि बिना वैकल्पिक व्यवस्था के उनके घर तोड़े जा रहे हैं।
हंगामे के बाद एक प्रतिनिधिमंडल ने महापौर सौरभ थपलियाल से मुलाकात कर एमडीडीए द्वारा जारी नोटिस दिखाए और ध्वस्तीकरण रोकने की मांग की। महापौर सौरभ थपलियाल ने बस्तीवासियों के बीच पहुंचकर उन्हें आश्वस्त किया कि वह इस मामले में एमडीडीए के अधिकारियों और शहरी विकास मंत्री से वार्ता करेंगे। उनके आश्वासन के बाद बस्तीवासी शांत होकर वापस लौट गए। दरअसल, यह कार्रवाई उच्चतम न्यायालय और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के आदेशों के अनुपालन में की जा रही है।
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रिस्पना नदी के अधिसूचित बाढ़ परिक्षेत्र में मौजूद अवैध निर्माणों को हटाने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। इसी क्रम में एमडीडीए ने तरला नागल और ढाकपट्टी क्षेत्रों में निवासियों को नोटिस जारी कर अवैध निर्माणों की पहचान, सत्यापन और पुनर्वास से संबंधित जानकारी दी है। सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी के निर्देशों के अनुसार, रिस्पना नदी के बाढ़ क्षेत्र में नियमों के विपरीत किए गए सभी निर्माण हटाए जाना अनिवार्य है। इसके लिए जिलाधिकारी देहरादून ने नगर आयुक्त की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित की है, जिसमें पुलिस, एमडीडीए, राजस्व और सिंचाई विभाग के अधिकारी शामिल हैं।
संयुक्त सर्वे के दौरान विद्युत बिल, गैस कनेक्शन और स्थलीय निरीक्षण के आधार पर परिवारों की पात्रता का निर्धारण किया गया। सर्वे में सामने आया कि कई परिवार 11 मार्च 2016 से पूर्व इस क्षेत्र में बसे हुए हैं। ऐसे पात्र परिवारों को काठबंगला क्षेत्र में नगर निगम द्वारा निर्मित ईडब्ल्यूएस आवासीय फ्लैटों में पुनर्वासित करने की तैयारी की जा रही है। वहीं, जो निर्माण अदालत के आदेशों के अनुसार अवैध पाए जाएंगे, उन्हें ध्वस्त किया जाएगा।





