
उत्तराखंड सरकार ने राज्य में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ढाई लाख टन चावल का ऑर्डर दिया है, जिसका वितरण नए साल से शुरू होगा। नई राशन व्यवस्था के तहत गेहूं को शामिल कर चावल पर निर्भरता कम करने का निर्णय लिया गया है।
- नए साल पर उत्तराखंड के राशन कार्डधारकों को बड़ी राहत
- चावल संकट से उबरने की तैयारी, सरकार ने बदली आपूर्ति व्यवस्था
- पर्वतीय जिलों में राशन की किल्लत खत्म करने का दावा
- गेहूं-चावल के नए अनुपात से बदलेगी सार्वजनिक वितरण प्रणाली
देहरादून। उत्तराखंड में पिछले कुछ महीनों से सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत चावल की कमी से जूझ रहे लाखों उपभोक्ताओं के लिए नए साल की शुरुआत राहत भरी होने जा रही है। राज्य सरकार ने प्रदेश की खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से ढाई लाख टन चावल का ऑर्डर जारी किया है, जिससे जनवरी माह से राज्य के सभी जिलों में राशन वितरण व्यवस्था सामान्य होने की उम्मीद जताई जा रही है। खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग ने यह कदम इसलिए उठाया है ताकि राशन डिपो पर अनाज की कमी के कारण उपभोक्ताओं को होने वाली परेशानियों को समाप्त किया जा सके।
बीते कुछ समय से विशेषकर पर्वतीय जिलों और दूरस्थ क्षेत्रों में चावल की उपलब्धता को लेकर गंभीर समस्याएं सामने आ रही थीं। व्यवस्था में बदलाव और आपूर्ति श्रृंखला के कमजोर होने के कारण समय पर राशन डिपो तक चावल नहीं पहुंच पा रहा था। इसके चलते कई स्थानों पर उपभोक्ताओं को अधूरा राशन या देरी से अनाज मिलने की शिकायतें लगातार मिल रही थीं। इस स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने वेंडर को समय से पहले चावल की आपूर्ति का बड़ा ऑर्डर देकर स्थिति को संभालने का प्रयास किया है।
सरकार ने केवल चावल की आपूर्ति बढ़ाने तक ही खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि नए साल से राज्य खाद्य योजना के अंतर्गत राशन वितरण की पूरी संरचना में बदलाव करने का निर्णय भी लिया है। अब लाभार्थियों को प्रति यूनिट पांच किलो गेहूं और ढाई किलो चावल दिया जाएगा, जबकि इससे पहले साढ़े सात किलो चावल ही वितरित किया जाता था। इस बदलाव का उद्देश्य लोगों के आहार में संतुलन लाना और चावल पर अत्यधिक निर्भरता को कम करना बताया जा रहा है।
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के अपर आयुक्त पीएस पांगती के अनुसार, ढाई लाख टन चावल के ऑर्डर के बाद राज्य के सभी 13 जिलों में पर्याप्त मात्रा में अनाज की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने बताया कि गेहूं को राशन में शामिल किए जाने से न केवल पोषण स्तर बेहतर होगा, बल्कि भविष्य में चावल की मांग भी नियंत्रित रहेगी, जिससे संकट की पुनरावृत्ति की संभावना कम होगी।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि मैदानी इलाकों के साथ-साथ दुर्गम और दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों के लिए विशेष परिवहन व्यवस्था की जा रही है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी भी जिले में राशन वितरण बाधित न हो। विभाग का दावा है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद उपभोक्ताओं को समय पर और तय मात्रा में अनाज मिलेगा, जिससे लंबे समय से बनी अनिश्चितता का अंत होगा।
नए साल से उत्तराखंड में राशन वितरण को लेकर सरकार की यह पहल न केवल खाद्य सुरक्षा को मजबूत करेगी, बल्कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली में भरोसा भी बहाल करेगी। राज्य के लाखों राशन कार्डधारकों को इससे सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।





