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प्रेम और संवाद ही जीवन को सुंदर, सार्थक और खुशहाल बनाते हैं तथा समाज में सकारात्मकता का संचार करते हैं। लेखनी, प्रशंसा और स्नेहपूर्ण व्यवहार से न केवल संबंध मजबूत होते हैं, बल्कि प्रतिभाओं को भी सम्मान मिलता है।
- प्रेम से ही जीवन में आती है सच्ची खुशहाली
- संवाद से बढ़ती है समझ और घटता है तनाव
- लेखनी से समाज को मिलती है नई दिशा
- अच्छे शब्द कभी किसी को गरीब नहीं बनाते
सुनील कुमार माथुर
खुशियां हमारे पास न होने के बावजूद भी हम दूसरों को दे सकते हैं। खुशियां हमारे जीवन में चार चांद लगा देती हैं। खुशियों के साथ जीने के लिए हमें सभी के साथ प्रेमपूर्वक व्यवहार करना चाहिए। जब आप दूसरों के साथ प्रेमपूर्वक व्यवहार करेंगे, तो वे भी आपसे ऐसा ही व्यवहार करेंगे, जिससे आपसी संबंधों में तनाव कम होता है और प्रगाढ़ता बढ़ती है, वहीं आपसी दूरियां भी कम होती हैं।
यह ढाई अक्षर प्रेम के ही हैं, जो हमारे जीवन की बगिया को महका देते हैं। हर व्यक्ति के साथ नियमित रूप से संवाद कीजिए। संवाद करते रहने से हर दिन नवीन जानकारी हासिल होती है। साहित्य लेखन से समाज में जागृति आती है। आपके लेख और समाचार विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में देखकर पाठकों को बहुत खुशी होती है और वे नाना प्रकार की प्रतिक्रियाएं व्यक्त करते हुए लिखते हैं कि आप कलम के धनी हैं, नाइस आर्टिकल, अनमोल व सराहनीय आलेख।
यूं ही अपनी लेखनी से समाज को नई दशा व दिशा देते रहिए। ये वाक्य भले ही छोटे-छोटे हों, लेकिन समाज के लोगों को उनके नेक कार्यों पर ऐसी टिप्पणियों के माध्यम से प्रोत्साहित करते रहना चाहिए। आपकी टिप्पणी ही उनके लिए अमूल्य सम्मान कही जा सकती है।
किसी महापुरुष ने बहुत सुंदर बात कही है कि जिनके पास अच्छे मित्र होते हैं, वह व्यक्ति वास्तव में सबसे धनवान होता है और जिसके पास बोलने व लिखने के लिए अच्छे शब्द होते हैं, वह कभी भी गरीब नहीं हो सकता। इसलिए जीवन में हमेशा संवाद बनाए रखिए।
सुनील कुमार माथुर
सदस्य, अणुव्रत लेखक मंच, स्वतंत्र लेखक एवं पत्रकार, जोधपुर, राजस्थान








