
देहरादून। उत्तरकाशी के धराली में 5 अगस्त 2025 को आई आपदा ने इलाके में भारी तबाही मचाई थी। इस आपदा ने न केवल स्थानीय निवासियों की जिंदगी को प्रभावित किया, बल्कि बुनियादी ढांचे और संपत्ति को भी गंभीर नुकसान पहुँचाया। आपदा के कारणों की सही जानकारी जुटाने के लिए विशेषज्ञों की एक टीम को घटनास्थल पर भेजा गया।
विशेषज्ञ टीम में वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान, आईआईटी रुड़की, जीएसआई (Geological Survey of India), सीबीआरआई रुड़की और अन्य संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल थे। टीम ने 14 अगस्त को आपदाग्रस्त क्षेत्र का भौतिक अध्ययन किया और संभावित कारणों की पहचान के साथ भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचाव के लिए सुझाव भी तैयार किए।
इस टीम की रिपोर्ट पिछले महीने शासन को सौंपी जा चुकी है। हालांकि, अब तक इस रिपोर्ट में क्या कारण बताए गए हैं और किन उपायों की सिफारिश की गई है, यह जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। सूत्रों के अनुसार, रिपोर्ट में केवल आपदा के संभावित तकनीकी और भौगोलिक कारण ही नहीं, बल्कि भविष्य में जोखिम कम करने के उपायों और सुधारात्मक संस्तुतियों को भी शामिल किया गया है।
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शासन की ओर से सचिव, आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास, विनोद कुमार सुमन ने बताया कि रिपोर्ट का परीक्षण किया जा रहा है। जल्द ही इस रिपोर्ट को लेकर बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें आपदा के सभी पहलुओं और रिपोर्ट में प्रस्तुत सुझावों पर चर्चा की जाएगी। बैठक के बाद ही रिपोर्ट के निष्कर्ष और धराली आपदा के वास्तविक कारण जनता के सामने आएंगे।
विशेषज्ञों की जांच का उद्देश्य केवल आपदा के कारणों की पहचान करना नहीं है, बल्कि भविष्य में ऐसे हादसों से निपटने के लिए ठोस रणनीति तैयार करना भी है। अधिकारी यह भी मानते हैं कि स्थानीय भू-भाग की भौगोलिक स्थिति और मौसमीय बदलावों के साथ मानव गतिविधियों का असर भी इस आपदा में शामिल हो सकता है।
इस संबंध में स्थानीय लोग और पीड़ित परिवार रिपोर्ट के निष्कर्षों के इंतजार में हैं, ताकि नुकसान की भरपाई और भविष्य में सुरक्षा के उपायों को समझा जा सके।







