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कविता : मेरे नजरिया का प्यार… तलवार से भी तेज इसकी धार है बहुत ही धीमी धीमी इसकी मार है वैसे भी इस जिंदगी के दिन चार है बस उलझता फिरता है इसमें आदमी या तो बेड़ा गर्ग या फिर बेड़ा पार है,, #बंजारा महेश राठौर सोनू, मुजफ्फरनगर (उत्तर प्रदेश)
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लोगों की नजर में जो ये प्यार है
सच मेरी नजर में वो अत्याचार है
रोज कट कट कर मरता है आदमी
तलवार से भी तेज इसकी धार है
बहुत ही धीमी धीमी इसकी मार है
वैसे भी इस जिंदगी के दिन चार है
बस उलझता फिरता है इसमें आदमी
या तो बेड़ा गर्ग या फिर बेड़ा पार है,,
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