देहरादून। उत्तराखंड में मानसून का कहर जारी है और आने वाले चार दिन राज्य के लिए और कठिन साबित हो सकते हैं। मौसम विज्ञान विभाग ने भारी और अति भारी बारिश की आशंका को देखते हुए रेड और येलो अलर्ट जारी किए हैं। वहीं, हाइड्रोमेट डिवीजन ने कई जिलों में बाढ़ की चेतावनी भी दी है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र ने सभी जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं।
जिलों में रेड और येलो अलर्ट
- 1 सितंबर को देहरादून, पिथौरागढ़, बागेश्वर और नैनीताल में अति भारी बारिश की संभावना जताई गई है। इन जिलों में रेड अलर्ट जारी किया गया है, जबकि अन्य जिलों में येलो अलर्ट प्रभावी रहेगा।
- 2 सितंबर को भी देहरादून, चमोली और बागेश्वर जिलों में अति भारी वर्षा का अनुमान है, इन जिलों के लिए रेड अलर्ट रहेगा। बाकी जिलों को येलो अलर्ट में रखा गया है।
- 3 सितंबर को भारी बारिश की आशंका को देखते हुए पूरे राज्य के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है।
खतरे में नदियों का जलस्तर
सिंचाई विभाग के केंद्रीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष के अनुसार, शनिवार दोपहर तक ऋषिकेश के माया कुंड पर गंगा और मदकोट में गोरी नदी का जलस्तर बढ़ रहा है। वहीं, कुछ अन्य नदियों का जलस्तर स्थिर या घटने की स्थिति में है।
उत्तरकाशी जिले में पहले से ही यमुना का जलस्तर बढ़ गया है, जिसके चलते स्यानाचट्टी इलाका जलमग्न हो गया है। यहां पुल के ऊपर से पानी बहने की घटनाएं सामने आई हैं।
अब तक 1143.8 एमएम बरसात
मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, इस मानसून सीजन में अब तक 1143.8 मिमी वर्षा हो चुकी है।
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- 29 अगस्त सुबह 8:30 बजे से 30 अगस्त सुबह 8:30 बजे तक खटीमा में 63 मिमी, ऊखीमठ में 57.8 मिमी, कुथनौर में 49 मिमी, बाराकोट में 45 मिमी और जानकी चट्टी में 35 मिमी बारिश दर्ज की गई।
- उत्तरकाशी में 31, गंगानहर में 25.6, कर्णप्रयाग में 23.8 और जोशीमठ में 22.4 मिमी बरसात रिकार्ड हुई।
प्रशासन सतर्क
राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र ने जिलाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि बारिश और संभावित बाढ़ को देखते हुए निचले इलाकों में अलर्ट मोड में रहें। साथ ही, स्थानीय प्रशासन को राहत-बचाव दलों को तैयार रखने और जनता को समय-समय पर सतर्क करने को कहा गया है।







