
सुनील कुमार माथुर
हमारे शास्त्र और साहित्य कहते हैं कि
जिस घर में नारी का सम्मान होता हैं
वहां देवता निवास करते हैं चूंकि
नारी घर की लक्ष्मी हैं , वह सरस्वती हैं
नारी नव दुर्गा है , वह अन्नपूर्णा हैं
एक कुशल गृहणी है
घर को संवारने वाली हैं
नारी पूज्यनीय है , वंदनीय है फिर भला
कन्या के जन्म पर उसे बोझ क्यों समझा जाता हैं
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उसे पराये घर की कहकर
कोख में ही मारा जा रहा हैं
अगर देश में ऐसा ही चलता रहा तो
नवरात्रा में कन्या पूजन हेतु
कन्या कहां से आयेगी
अपने लाडलों के लिए
नई नवेली वधू कहां से लाओगे
कन्या के जन्म पर उसे बोझ क्यों समझा जाता हैं
लडके – लडकियों में भेद क्यों किया जा रहा हैं
यह कैसा विरोधाभास है
एक ओर हम अपने आपको
प्रगतिशील कह रहे हैं और वहीं दूसरी ओर
भ्रूण हत्या कर रहे हैं
अरे मूर्खों नारी जगत जननी है
वह सभी नियमों का पालन करती हैं
घर को खुशहाल बनाती हैं फिर भला
कन्या के जन्म पर परिजनों के चेहरों पर
यह कैसी मायूसी ?
कन्या के जन्म पर तो घर में
थाली बजाइये और खुशियां मनाइये
अगर कन्याएं नहीं होगी तो
आपके घर में नई नवेली दुल्हन कहां से आयेगी
अतः
कन्या के जन्म पर हताश , निराश व
उदास मत होईये
कहते हैं कि कन्या वही जन्म लेती है
जो लोग भाग्यशाली होते हैं
कन्या के जन्म पर उसे बोझ न समझें
वह तो देवी है , वंदनीय है , पूज्यनीय है
फिर
उसके जन्म पर हताशा व निराशा का भाव क्यों?
¤ प्रकाशन परिचय ¤
![]() | From »सुनील कुमार माथुरलेखक एवं कविAddress »33, वर्धमान नगर, शोभावतो की ढाणी, खेमे का कुआ, पालरोड, जोधपुर (राजस्थान)Publisher »देवभूमि समाचार, देहरादून (उत्तराखण्ड) |
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