
यह आलेख स्वार्थ के कारण टूटते रिश्तों और विश्वास के महत्व को सरल शब्दों में रेखांकित करता है। लेखक बताता है कि संबंधों की असली शक्ति प्रेम, स्नेह और विश्वास में निहित होती है, जिन्हें एक बार खो देने पर वापस पाना कठिन हो जाता है। साथ ही लेख अच्छे लोगों के संग से जीवन को बेहतर बनाने की प्रेरणा देता है।
- रिश्तों की मधुरता और समय का मूल्य
- विश्वास : दिलों में उगता पवित्र पौधा
- अच्छाई, ईर्ष्या और जीवन की सीख
सुनील कुमार माथुर
आज का इंसान इतना स्वार्थी हो गया है कि वह अपने स्वार्थ की खातिर कुछ भी करने को तैयार है। यहाँ तक कि वर्षों पुराने मधुर संबंधों को भी एक झटके में तहस-नहस कर देता है और जब उसे संबंधों का महत्व पता चलता है, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। संबंध तो फिर से बन जाते हैं, लेकिन उनमें वह मधुरता नहीं होती जो पहले थी। उस संबंध में एक गाँठ बँध जाती है। इसलिए जीवन में कभी भी किसी से संबंध न बिगाड़ें, क्योंकि मधुर संबंध बनाने में वर्षों लग जाते हैं, तो कभी-कभी पूरी ज़िंदगी भी लग जाती है। हमारे बड़े-बुज़ुर्ग कहते भी हैं कि मिट्टी के मटके और परिवार की कीमत केवल बनाने वाले को ही पता होती है, तोड़ने वाले को नहीं।
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“संबंध” एक ऐसा पेड़ है, जो “प्रेम” से “झुक” जाता है, “स्नेह” से “पनप” जाता है और शब्द से “टूट” जाता है। दुनिया का सबसे पवित्र पौधा “विश्वास” का होता है, जो धरती पर नहीं, “दिलों” में उगता है। कहने का तात्पर्य यह है कि जहाँ संबंध मजबूत और मधुर होते हैं, वहाँ असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं, क्योंकि मददगार हमारे अपने ही होते हैं और उन्हें हम पर पूरा विश्वास होता है। जहाँ विश्वास की नींव मजबूत होती है, वहाँ कभी भी अविश्वास नहीं पनप सकता। इसलिए विश्वास को बनाए रखिए। लोग हम पर विश्वास इसलिए करते हैं कि वे भगवान के बाद हमें ही अपना हितैषी मानते हैं, इसलिए कभी भी किसी का विश्वास न तोड़ें और विश्वास को हमेशा बनाए रखें।
व्यवहार में हम हर रोज देखते हैं कि ज़्यादातर अच्छे लोग लोगों को बुरे लगने लगते हैं, क्योंकि वे स्वयं तो अच्छे बन नहीं पाते और दूसरों की अच्छाइयों को सहन नहीं कर पाते। नतीजतन वे अच्छे लोगों को बुरा कहते हैं, उनसे ईर्ष्या करते हैं और नफरत करते हैं। ऐसा करना उचित नहीं है। हमें अच्छे लोगों का संग करना चाहिए और उनके जीवन से हर रोज अच्छी बातें सीखकर उन्हें जीवन में आत्मसात करना चाहिए।
सुनील कुमार माथुर
सदस्य, अणुव्रत लेखक मंच एवं, स्वतंत्र लेखक व पत्रकार, जोधपुर, राजस्थान








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