
कुख्यात हिस्ट्रीशीटर विनय त्यागी पर जानलेवा हमला करने वाले दोनों शूटरों को पुलिस ने हरिद्वार जेल भेज दिया है। रुड़की जेल में गैंगवार की आशंका को देखते हुए यह निर्णय लिया गया, ताकि किसी बड़ी आपराधिक घटना को रोका जा सके।
- लक्सर गोलीकांड के बाद जेल प्रशासन और पुलिस अलर्ट
- रुड़की जेल में गैंगवार की आशंका, न्यायालय में दाखिल हुआ प्रार्थनापत्र
- हमले में प्रयुक्त बाइक और जैकेट पहले ही बरामद
- एम्स ऋषिकेश में भर्ती है कुख्यात हिस्ट्रीशीटर विनय त्यागी
देहरादून। कुख्यात हिस्ट्रीशीटर विनय त्यागी पर पुलिस अभिरक्षा में हुए जानलेवा हमले के मामले में गिरफ्तार किए गए दोनों शूटरों को न्यायालय के आदेश पर हरिद्वार जेल भेज दिया गया है। यह फैसला सुरक्षा कारणों से लिया गया है, क्योंकि आशंका जताई जा रही थी कि यदि आरोपियों को रुड़की जेल में रखा गया तो वहां गैंगवार जैसी गंभीर स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
24 दिसंबर को उस समय सनसनी फैल गई थी, जब रुड़की जेल से पुलिस अभिरक्षा में लक्सर कोर्ट में पेशी के लिए लाए जा रहे कुख्यात अपराधी विनय त्यागी पर आरओबी के पास अचानक गोलियां चला दी गई थीं। हमले में विनय त्यागी गंभीर रूप से घायल हो गया था और उसे तत्काल एम्स ऋषिकेश में भर्ती कराया गया, जहां उसका इलाज चल रहा है। इस घटना ने पुलिस सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।
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पुलिस ने घटना के बाद तेजी से कार्रवाई करते हुए बृहस्पतिवार देर शाम हमले को अंजाम देने वाले दोनों शूटर सन्नी यादव उर्फ शेरा और अजय को गिरफ्तार कर लिया था। पूछताछ और जांच के दौरान आरोपियों की निशानदेही पर एक अतिरिक्त जैकेट भी बरामद की गई। इससे पहले वारदात में प्रयुक्त बाइक और एक जैकेट घटना वाली रात ही पुलिस के हाथ लग चुकी थी।
जांच में सामने आया कि पहचान छिपाने और बच निकलने के लिए हमलावरों ने अपनी जैकेट और बाइक जंगल में फेंक दी थी। पुलिस ने आरोपियों को उन रास्तों पर भी ले जाकर जांच की, जिनसे होकर वे फरार हुए थे, ताकि घटनाक्रम से जुड़े ठोस साक्ष्य जुटाए जा सकें। इसके बाद दोनों आरोपियों को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच न्यायालय में पेश किया गया।
कोतवाली प्रभारी राजीव रौथाण ने बताया कि पुलिस को आशंका थी कि विनय त्यागी का कोई करीबी या गैंग से जुड़ा सदस्य पहले से ही रुड़की जेल में बंद हो सकता है। ऐसी स्थिति में दोनों शूटरों को उसी जेल में रखने से टकराव और गैंगवार की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता था। इसी वजह से पुलिस ने न्यायालय में प्रार्थनापत्र दाखिल कर दोनों आरोपियों को रुड़की के बजाय हरिद्वार जेल भेजने की अनुमति मांगी थी।
न्यायालय ने पुलिस की दलीलों को गंभीरता से लेते हुए दोनों आरोपियों को हरिद्वार जेल भेजने के आदेश दिए। पुलिस प्रशासन का मानना है कि यह कदम न केवल जेल की आंतरिक सुरक्षा के लिए आवश्यक था, बल्कि किसी भी संभावित बड़ी आपराधिक घटना को टालने के लिए भी जरूरी था।
इस पूरे मामले ने एक बार फिर अपराधियों की आपसी रंजिश, गैंग नेटवर्क और पुलिस अभिरक्षा में सुरक्षा व्यवस्था की चुनौतियों को उजागर कर दिया है। फिलहाल पुलिस हमले की साजिश, इसके पीछे की आपराधिक पृष्ठभूमि और संभावित गैंग एंगल की गहनता से जांच कर रही है, ताकि मामले की हर कड़ी को जोड़ा जा सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।





