
चमोली जनपद की फूलों की घाटी रेंज के जंगलों में लगी आग पर नजर रखने के लिए वायुसेना का हेलिकॉप्टर ज्योतिर्मठ में तैनात किया गया है। हालांकि अब तक आग बुझाने के लिए हेलिकॉप्टर से बांबी बकेट के माध्यम से पानी नहीं डाला गया है।
- फूलों की घाटी के वनों में आग से वन विभाग अलर्ट
- भारतीय सेना के साथ मिलकर सर्वे कर रहा वायुसेना का हेलिकॉप्टर
- नंदा देवी बायोस्फीयर रिजर्व प्रशासन ने की केंद्रीय कमान से बातचीत
- सोशल मीडिया पर वायरल पुराने फोटो हटाने का किया गया आग्रह
देहरादून। उत्तराखंड के चमोली जनपद अंतर्गत विश्व प्रसिद्ध फूलों की घाटी रेंज के जंगलों में लगी आग ने वन विभाग और प्रशासन की चिंताएं बढ़ा दी हैं। आग पर नियंत्रण और स्थिति का आकलन करने के लिए भारतीय वायु सेना का एक हेलिकॉप्टर ज्योतिर्मठ में तैनात किया गया है, जो बीते दो से तीन दिनों से भारतीय सेना के साथ समन्वय बनाकर प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी और सर्वेक्षण का कार्य कर रहा है। वन विभाग के अनुसार, आग से प्रभावित वन क्षेत्रों का हवाई सर्वे पूरा कर लिया गया है।
दुर्गम और संवेदनशील इलाकों में आग की तीव्रता, फैलाव और संभावित खतरे का आकलन किया जा रहा है, ताकि आगे की रणनीति तय की जा सके। हालांकि, फिलहाल आग बुझाने के लिए हेलिकॉप्टर से बांबी बकेट के जरिए पानी डालने की कार्रवाई शुरू नहीं की गई है। इस पूरे मामले में फूलों की घाटी रेंज की वन क्षेत्राधिकारी चेतना कंडपाल ने वायु सेना के विंग कमांडर दीपक रहेजा से सीधे संवाद किया। वहीं नंदा देवी बायोस्फीयर रिजर्व के निदेशक आकाश वर्मा ने भी दूरभाष के माध्यम से विंग कमांडर से संपर्क कर स्थिति पर चर्चा की।
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निदेशक आकाश वर्मा ने केंद्रीय कमान से यह भी आग्रह किया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर बांबी बकेट से आग बुझाने से संबंधित पुराने और भ्रामक फोटो हटाए जाएं, ताकि आमजन में किसी तरह का भ्रम न फैले। विभाग का कहना है कि वर्तमान में केवल निगरानी और सर्वेक्षण किया जा रहा है, जबकि आग बुझाने के लिए जमीनी स्तर पर वन कर्मी लगातार प्रयासरत हैं।
प्रशासन का मानना है कि मौसम, भू-भाग और हवा की दिशा को ध्यान में रखते हुए ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। फूलों की घाटी जैसे संवेदनशील पारिस्थितिकी क्षेत्र में आग की घटनाएं न केवल जैव विविधता के लिए खतरा हैं, बल्कि पर्यावरण संतुलन पर भी गंभीर असर डाल सकती हैं। ऐसे में वन विभाग, सेना और वायुसेना के संयुक्त प्रयासों से आग पर जल्द नियंत्रण पाने की उम्मीद जताई जा रही है।





