
देहरादून। राजधानी देहरादून में वकीलों के कल्याण कोष (Lawyers Welfare Fund) के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है। आरोप है कि कुछ लोगों ने वकीलों के वेलफेयर के लिए जारी कूपनों की नकली प्रतियां छापकर लाखों रुपये की धोखाधड़ी की है। इस मामले में देहरादून बार एसोसिएशन ने औपचारिक शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद शहर कोतवाली पुलिस ने धोखाधड़ी और जालसाजी का मुकदमा दर्ज कर लिया है।
जानकारी के अनुसार, हाल के दिनों में बार एसोसिएशन द्वारा वकीलों के हित में कल्याण योजनाओं के लिए फंड इकट्ठा करने हेतु विशेष कूपन जारी किए गए थे। इन कूपनों के माध्यम से सदस्य अपनी आर्थिक सहायता और सामाजिक कल्याण के लिए योगदान देते हैं। लेकिन कुछ असामाजिक तत्वों ने इस योजना का दुरुपयोग करते हुए नकली कूपन छापे और उन्हें वास्तविक दिखाकर वकीलों और अन्य लोगों से पैसे वसूल लिए।
बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बताया कि जब कार्यालय के रिकॉर्ड का मिलान किया गया तो कई कूपन नंबर दोहराए हुए मिले। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि नकली कूपन की छपाई अत्यंत कुशल तरीके से की गई थी, जिससे असली और नकली की पहचान करना मुश्किल था। इस पर एसोसिएशन ने तत्काल बैठक बुलाई और मामले को पुलिस के संज्ञान में लाया।
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शहर कोतवाली पुलिस के अनुसार, शिकायत दर्ज कर मामले की जांच साइबर सेल और क्राइम ब्रांच को सौंपी गई है। पुलिस ने कुछ संदिग्ध व्यक्तियों को पूछताछ के लिए बुलाया है और कूपन छपाई से संबंधित डिजिटल साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। प्रारंभिक अनुमान है कि धोखाधड़ी की रकम कई लाख रुपये तक पहुँच सकती है।
देहरादून बार एसोसिएशन ने इसे पेशे की गरिमा पर हमला बताया है। अध्यक्ष ने कहा कि “यह घटना न केवल आर्थिक अपराध है बल्कि न्याय व्यवस्था से जुड़े पेशे की साख को ठेस पहुँचाने वाली है। दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने के लिए एसोसिएशन पूरी तरह से कानूनी प्रक्रिया में सहयोग करेगा।”
पुलिस ने वकीलों और अन्य पेशेवर संगठनों से अपील की है कि वे अपने वित्तीय लेन-देन से जुड़े सभी दस्तावेजों की जांच करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत दें।
यह मामला न केवल आर्थिक अपराध का उदाहरण है, बल्कि यह दिखाता है कि किस तरह तकनीक और प्रिंटिंग की आड़ में अब विश्वसनीय संस्थानों को भी निशाना बनाया जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद इस फर्जीवाड़े के नेटवर्क का खुलासा होने की संभावना है।





