
उत्तराखंड सरकार ने वर्ष 2026 के लिए सार्वजनिक अवकाशों का कैलेंडर जारी कर दिया है, जिससे सरकारी कर्मचारियों, शिक्षण संस्थानों और आम नागरिकों को पूरे वर्ष की छुट्टियों की स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी। इस कैलेंडर में राष्ट्रीय पर्वों के साथ-साथ राज्य के सांस्कृतिक और धार्मिक त्योहारों को भी शामिल किया गया है।
- नए साल 2026 में उत्तराखंडवासियों को मिलेंगी दर्जनों सरकारी छुट्टियां
- राज्य सरकार ने जारी किया सार्वजनिक अवकाशों का आधिकारिक कैलेंडर
- धार्मिक, राष्ट्रीय और स्थानीय पर्वों पर तय हुई छुट्टियों की सूची
- स्कूलों, कार्यालयों और संस्थानों की कार्ययोजना होगी आसान
देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने आगामी वर्ष 2026 के लिए सार्वजनिक अवकाशों का आधिकारिक कैलेंडर जारी कर दिया है। इस कैलेंडर के जारी होने से राज्य के सरकारी कर्मचारियों, शिक्षण संस्थानों, बैंकों और आम नागरिकों को पूरे साल मिलने वाली छुट्टियों की पूर्व जानकारी मिल सकेगी। हर वर्ष की तरह इस बार भी राष्ट्रीय पर्वों, धार्मिक त्योहारों और राज्य-विशेष अवसरों को ध्यान में रखते हुए अवकाश निर्धारित किए गए हैं।
राज्य सरकार द्वारा जारी कैलेंडर में गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस, गांधी जयंती जैसे राष्ट्रीय पर्वों के साथ-साथ होली, दीपावली, ईद, क्रिसमस, मकर संक्रांति, हरेला और अन्य पर्वों को भी सार्वजनिक अवकाश के रूप में शामिल किया गया है। इससे स्पष्ट होता है कि सरकार ने प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता और सामाजिक परंपराओं को ध्यान में रखते हुए अवकाश सूची तैयार की है।
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सार्वजनिक अवकाश कैलेंडर जारी होने से सरकारी कार्यालयों की वार्षिक कार्ययोजना बनाने में आसानी होगी। वहीं, स्कूल-कॉलेजों के शैक्षणिक सत्र, परीक्षाओं और अवकाशों की योजना भी इसी के आधार पर तय की जा सकेगी। निजी क्षेत्र के संस्थानों और उद्योगों के लिए भी यह कैलेंडर मार्गदर्शक की भूमिका निभाएगा।
राज्य सरकार का मानना है कि समय से अवकाश कैलेंडर जारी होने से कर्मचारियों को पारिवारिक कार्यक्रमों, धार्मिक आयोजनों और यात्राओं की बेहतर योजना बनाने का अवसर मिलेगा। खास तौर पर पर्वतीय राज्य उत्तराखंड में, जहां त्योहार और मेलों का सामाजिक जीवन में विशेष महत्व है, यह कैलेंडर लोगों के लिए उपयोगी साबित होगा।
कुल मिलाकर, वर्ष 2026 के लिए सार्वजनिक अवकाशों की घोषणा को कर्मचारियों और नागरिकों के लिए राहत भरी खबर माना जा रहा है, क्योंकि इससे न केवल कार्य और अवकाश के बीच संतुलन बनाने में मदद मिलेगी, बल्कि सामाजिक और पारिवारिक जीवन को भी बेहतर ढंग से नियोजित किया जा सकेगा।





