
Uttarakhand में इस वर्ष सितंबर में 131 गांवों और Badrinath, Kedarnath तथा Gangotri सहित तीन कस्बों में जनगणना कराई जाएगी। यह जनगणना पूरी तरह डिजिटल और पेपरलेस होगी, जिसमें नागरिकों को स्व-गणना की सुविधा भी पहली बार मिलेगी। राज्य को 30 हजार गणना क्षेत्रों में बांटकर प्रगणक और सुपरवाइजर तैनात किए जाएंगे।
- उत्तराखंड में दो चरणों में होगी जनगणना, 30 हजार गणना क्षेत्र बनाए
- नागरिक खुद भी कर सकेंगे स्व-जनगणना, जल्द लॉन्च होगा पोर्टल
- हिमाच्छादित क्षेत्रों में इस साल पहले होगी गणना
- प्रशासनिक सीमाएं मार्च 2027 तक रहेंगी सील
देहरादून। देशभर में जनगणना की अधिसूचना जारी होने के बाद Uttarakhand में भी तैयारियां तेज हो गई हैं। इस बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल और पेपरलेस होगी। हालांकि प्रदेश में मुख्य जनगणना अगले वर्ष 9 से 28 फरवरी 2027 के बीच प्रस्तावित है, लेकिन हिमाच्छादित और दुर्गम क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए 131 गांवों और तीन प्रमुख कस्बों—Badrinath, Kedarnath और Gangotri—में जनगणना इसी वर्ष सितंबर माह में कराई जाएगी।
जनगणना निदेशक ईवा आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि राज्य में जनगणना दो चरणों में संपन्न होगी। पहला चरण मकान सूचीकरण का होगा, जो 25 अप्रैल से 24 मई के बीच प्रस्तावित है। इसके लिए राज्य स्तर पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित स्टेट लेवल इंपावर्ड कमेटी ने प्रस्ताव तैयार किया है, जिसे मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami की स्वीकृति मिलनी शेष है। प्रदेश को लगभग 30 हजार गणना क्षेत्रों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक गणना क्षेत्र में एक प्रगणक नियुक्त होगा, जबकि छह प्रगणकों पर एक सुपरवाइजर की निगरानी रहेगी।
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अधिकतर प्रगणक स्थानीय शिक्षक होंगे, जिन्हें तीन दिन का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस बार की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि जनगणना पूरी तरह डिजिटल माध्यम से की जाएगी। सीएमएमएस पोर्टल के जरिए प्रशिक्षण, निगरानी और प्रगति रिपोर्टिंग की जाएगी। प्रगणक मोबाइल ऐप के माध्यम से डेटा दर्ज करेंगे। कागज आधारित प्रक्रिया पूरी तरह समाप्त कर दी जाएगी। पहली बार नागरिकों को स्व-जनगणना की सुविधा भी दी जा रही है। इसके लिए जल्द ही एक पोर्टल लॉन्च किया जाएगा, जहां नागरिक अपने मोबाइल नंबर से पंजीकरण कर स्वयं अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे।
पंजीकरण के बाद उन्हें एक यूनिक आईडी प्रदान की जाएगी। जब प्रगणक घर पहुंचेगा तो वह इस आईडी के आधार पर दर्ज जानकारी का सत्यापन करेगा। यदि स्व-गणना नहीं की गई होगी तो प्रगणक स्वयं ऐप के माध्यम से विवरण दर्ज करेगा। अधिसूचना जारी होने के बाद राज्य की प्रशासनिक और भौगोलिक सीमाएं 31 दिसंबर 2025 की स्थिति के अनुसार सील कर दी गई हैं, जो मार्च 2027 तक प्रभावी रहेंगी। इसका अर्थ है कि गांव, वार्ड, नगर या जिला सीमाओं में कोई परिवर्तन जनगणना प्रक्रिया पूरी होने तक लागू नहीं होगा।
प्रदेश के दुर्गम और विषम भौगोलिक क्षेत्रों में पहुंचने को लेकर भी व्यापक तैयारी की गई है। आवश्यकता पड़ने पर राज्य सरकार अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध करा सकती है। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार प्रदेश में 16,793 राजस्व ग्राम थे, जिनमें 1048 गैर आबाद थे। आगामी जनगणना के दौरान प्रत्येक गांव तक पहुंच सुनिश्चित की जाएगी, चाहे वह आबाद हो या निर्जन। डिजिटल और पारदर्शी प्रणाली के माध्यम से इस बार की जनगणना को अधिक सटीक, प्रभावी और तकनीक आधारित बनाने का लक्ष्य रखा गया है।





