
उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित माणा गांव को भारत का पहला गांव कहा जाता है, जो बद्रीनाथ धाम से महज तीन किलोमीटर दूर है। यह गांव न सिर्फ प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि अदृश्य सरस्वती नदी और पौराणिक मान्यताओं के कारण भी विशेष महत्व रखता है।
- भारत-तिब्बत सीमा के पास बसा रहस्यमयी माणा गांव
- पांडवों के स्वर्गारोहण से जुड़ी हैं माणा की मान्यताएं
- भीम पुल से व्यास गुफा तक, हर कदम पर इतिहास
- प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक शांति का अनोखा संगम
चमोली (उत्तराखंड)। देवभूमि उत्तराखंड अपने प्राकृतिक सौंदर्य, आध्यात्मिक ऊर्जा और पौराणिक विरासत के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है। यहां नैनीताल और मसूरी जैसे हिल स्टेशन जहां पर्यटकों को आकर्षित करते हैं, वहीं उत्तराखंड की ऊंची हिमालयी घाटियों में बसा माणा गांव अपनी अलग पहचान रखता है। माणा गांव को ‘भारत का पहला गांव’ कहा जाता है और यह कई मायनों में बेहद खास है। चमोली जिले में स्थित माणा गांव भारत-तिब्बत सीमा के निकट बसा हुआ है और बद्रीनाथ धाम से इसकी दूरी मात्र तीन किलोमीटर है।
बद्रीनाथ यात्रा पर आने वाले श्रद्धालु अक्सर माणा गांव जरूर जाते हैं, क्योंकि यह स्थान धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। माणा गांव की सबसे बड़ी विशेषता यहां बहने वाली अदृश्य सरस्वती नदी है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सरस्वती नदी यहां धरती के भीतर प्रवाहित होती है, जो इस स्थान को भारत में अद्वितीय बनाती है। यही कारण है कि माणा को आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र माना जाता है।
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गांव का नाम मणिभद्र देव के नाम पर पड़ा बताया जाता है। मान्यता है कि यह धरती का ऐसा स्थान है जिसे शापमुक्त और पापमुक्त माना गया है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, महाभारत काल में पांडव स्वर्गारोहण के लिए इसी मार्ग से गुजरे थे। इसी कथा से जुड़ा है यहां का प्रसिद्ध भीम पुल, जिसके बारे में कहा जाता है कि एक उफनते झरने को पार करने के लिए महाबली भीम ने विशाल चट्टान रखकर पुल का निर्माण किया था।
माणा गांव केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्राकृतिक सौंदर्य का भी अनुपम उदाहरण है। चारों ओर हिमालय की ऊंची चोटियां, बर्फ से ढकी पहाड़ियां और शांत वातावरण इस गांव को बेहद खास बनाते हैं। यहां आने वाले पर्यटक व्यास गुफा, गणेश गुफा, सरस्वती नदी, वसुंधरा जलप्रपात और तप्त कुंड जैसे दर्शनीय स्थलों का दीदार कर सकते हैं। पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि माणा गांव उन लोगों के लिए आदर्श स्थान है, जो भीड़भाड़ से दूर रहकर प्रकृति, इतिहास और अध्यात्म को एक साथ महसूस करना चाहते हैं।
बदलते समय के बावजूद माणा गांव आज भी अपनी पौराणिक गरिमा और सांस्कृतिक पहचान को संजोए हुए है। कुल मिलाकर, माणा गांव सिर्फ एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि भारत की सभ्यता, आस्था और प्रकृति का जीवंत प्रतीक है, जो हर भारतीय को एक बार जरूर देखना चाहिए।





