
गोपेश्वर स्थित उत्तराखंड ग्रामीण बैंक में पूर्व प्रबंधक अनुराग पुंडीर द्वारा 3.19 करोड़ रुपये के फर्जी लोन घोटाले का खुलासा हुआ है। आरोप है कि उन्होंने मृतकों और फर्जी सरकारी कर्मचारियों के नाम पर लोन लेकर राशि अपने खातों में ट्रांसफर की।
- फर्जी खातों से देहरादून तक ट्रांसफर हुई रकम
- किस्तें जमा होने से लंबे समय तक छिपा रहा घोटाला
- महिला के खाते की जांच से खुला बैंक फर्जीवाड़ा
- मुकदमा दर्ज, आरोपित प्रबंधक फरार
गोपेश्वर। उत्तराखंड ग्रामीण बैंक की गोपेश्वर शाखा में करोड़ों रुपये के फर्जीवाड़े का सनसनीखेज मामला सामने आया है। बैंक के पूर्व शाखा प्रबंधक अनुराग पुंडीर पर 3 करोड़ 19 लाख रुपये का फर्जी लोन पास कर बैंक को भारी नुकसान पहुंचाने का आरोप लगा है। हैरानी की बात यह है कि इस घोटाले में मृत व्यक्तियों और फर्जी सरकारी कर्मचारियों के नाम पर भी ऋण स्वीकृत किए गए।
प्राथमिक जांच में सामने आया है कि आरोपी प्रबंधक ने अपने कार्यकाल (2022 से 2025) के दौरान फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कई खाते खोले। इन खातों में कुछ ऐसे लोगों को सरकारी शिक्षक और कर्मचारी बताया गया, जो वास्तव में कभी सरकारी सेवा में थे ही नहीं। इन फर्जी खातों के जरिए 30-30 लाख रुपये की लिमिट स्वीकृत की गई।
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मृत पुलिसकर्मी के नाम पर भी लोन
जांच में यह भी सामने आया है कि एक पुलिसकर्मी की मृत्यु के बाद बंद किए गए खाते पर भी लोन लिमिट बना दी गई। चौंकाने वाली बात यह रही कि इन लोन खातों पर नियमित किस्तें जमा होती रहीं, जिससे बैंक के अधिकारियों को लंबे समय तक किसी भी तरह की गड़बड़ी का शक नहीं हुआ। इस बड़े घोटाले का पर्दाफाश तब हुआ जब तिलफारा गांव की स्वयं सहायता समूह से जुड़ी एक महिला नया खाता खुलवाने बैंक पहुंची। जांच में पता चला कि महिला के नाम से पहले से खाता मौजूद है, जिस पर 32 लाख रुपये का लोन चल रहा था। महिला के इंकार करने पर शाखा स्तर पर गहन जांच शुरू की गई।
रकम अपने खातों में की ट्रांसफर
जांच अधिकारी और सीनियर मैनेजर सुधीर कुमार के अनुसार, फर्जी लोन से निकाली गई राशि को आरोपी ने खुद के और अपने पिता के देहरादून स्थित बैंक खातों में ट्रांसफर किया। इस तरह बैंक की रकम को निजी इस्तेमाल में लाया गया। मामला उजागर होने के बाद गोपेश्वर थाने में आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। थानाध्यक्ष नरेश राठौर ने बताया कि आरोपी फिलहाल फरार है और उसके तीनों मोबाइल नंबर बंद हैं। सभी बिंदुओं पर जांच जारी है और बैंक स्तर से भी आंतरिक ऑडिट तेज कर दिया गया है।
निलंबन के बाद भी नहीं मिला सुराग
बताया जा रहा है कि अनुराग पुंडीर की गोपेश्वर शाखा में तैनाती 17 अगस्त 2022 को हुई थी। वर्तमान में उनकी तैनाती देहरादून दर्शाई जा रही है, लेकिन निलंबन के बाद से वे संपर्क से बाहर हैं। यह मामला न सिर्फ बैंकिंग व्यवस्था की आंतरिक निगरानी पर सवाल खड़े करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि सिस्टम की कमजोरियों का फायदा उठाकर किस तरह करोड़ों का घोटाला अंजाम दिया जा सकता है।





