
उत्तराखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण से पहले चल रही प्री एसआईआर मतदाता मैपिंग की समीक्षा के लिए चुनाव आयोग ने चार वरिष्ठ अधिकारियों को जिलों में तैनात किया है। 81 प्रतिशत से अधिक प्रगति के बावजूद मैदानी जिलों में सुस्ती को लेकर आयोग सख्त है। लापरवाही बरतने वाले बीएलओ पर सीधे कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
- 81% पार हुई मतदाता मैपिंग, मैदानी जिलों में धीमी रफ्तार
- बीएलओ को अतिरिक्त स्टाफ देने के निर्देश
- जिलाधिकारियों को रोजाना समीक्षा का आदेश
- लापरवाही पर सीधे कार्रवाई करेगा आयोग
देहरादून | उत्तराखंड में आगामी विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से पहले मतदाता सूचियों की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए प्री एसआईआर के तहत व्यापक मैपिंग अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान की प्रगति की समीक्षा के लिए Election Commission of India ने अब अपने वरिष्ठ अधिकारियों को सीधे मैदान में उतार दिया है। प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने बताया कि राज्य में मतदाता मैपिंग का कार्य 81 प्रतिशत से अधिक पूरा हो चुका है।
हालांकि, मैदानी जिलों में अपेक्षित गति नहीं दिखने पर आयोग ने सख्ती बरतने का निर्णय लिया है। इसी क्रम में चार वरिष्ठ अधिकारियों को अलग-अलग जिलों की जिम्मेदारी सौंपी गई है, ताकि जमीनी स्तर पर कार्य की निगरानी सुनिश्चित की जा सके। अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे को देहरादून, हरिद्वार और पौड़ी जिलों की जिम्मेदारी दी गई है। संयुक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी प्रकाश चंद्र को पिथौरागढ़, बागेश्वर और अल्मोड़ा का दायित्व सौंपा गया है।
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उप मुख्य निर्वाचन अधिकारी किशन सिंह नेगी उत्तरकाशी, टिहरी, रुद्रप्रयाग और चमोली की निगरानी करेंगे, जबकि सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी मस्तू दास को ऊधमसिंह नगर, नैनीताल और चंपावत जिलों की जिम्मेदारी दी गई है। आयोग ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे प्री एसआईआर की रोजाना समीक्षा करें और जिन क्षेत्रों में बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) को दिक्कत आ रही है, वहां अतिरिक्त स्टाफ उपलब्ध कराया जाए। ईआरओ को भी अपने-अपने क्षेत्र में नियमित मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी दी गई है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई गई तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध सीधे कार्रवाई की जाएगी। कुछ बीएलओ को पहले ही चेतावनी जारी की जा चुकी है। आयोग का उद्देश्य है कि अप्रैल में शुरू होने वाले एसआईआर से पहले अधिकतम कार्य पूर्ण हो जाए, ताकि मतदाता सूची में त्रुटियों को न्यूनतम किया जा सके। चुनाव आयोग का मानना है कि सटीक और अद्यतन मतदाता सूची निष्पक्ष चुनाव की आधारशिला है। इसलिए प्री एसआईआर की प्रक्रिया को समयबद्ध और पारदर्शी ढंग से पूरा करना सर्वोच्च प्राथमिकता है।





