
राज शेखर भट्ट
उत्तराखण्ड एक ऐसा राज्य है जिसने अपनी प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक समृद्धि, मानवीय मूल्य और सामाजिक संरचना से पूरे देश को प्रभावित किया है। हिमालय की गोद में बसा यह राज्य न केवल पर्यटन के लिए जाना जाता है, बल्कि आज यह करियर अवसरों, शिक्षा, खेल, संगीत और बॉलीवुड की दुनिया में भी अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। समय के साथ उत्तराखण्ड के युवाओं, कलाकारों और पेशेवरों ने साबित किया है कि पहाड़ की सीमाएं कभी विकास को रोकती नहीं, बल्कि संघर्ष, धैर्य और प्रतिभा को और अधिक निखारती हैं। यही कारण है कि आज उत्तराखण्ड एक उभरता हुआ केंद्र है—जहां से प्रतिभाएं निकलकर देश के हर क्षेत्र में अपनी छाप छोड़ रही हैं।
उत्तराखण्ड का भौगोलिक वातावरण, शांति और उच्च शिक्षा स्तर युवाओं को एक अलग दृष्टिकोण प्रदान करता है। यहां के छोटे-छोटे गांवों में जन्मे बच्चे भी बड़े सपने देखते हैं और अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए कठोर परिश्रम करते हैं। शिक्षा और करियर के क्षेत्र में राज्य लगातार प्रगति कर रहा है। देहरादून, हल्द्वानी, ऋषिकेश और पिथौरागढ़ जैसे शहर अब उच्च शिक्षा का केंद्र बन चुके हैं। बड़े कोचिंग सेंटर, विश्वविद्यालय, आईटी क्षेत्र की संभावनाएं, सरकारी नौकरियों की तैयारी के लिए संस्थान और खेल अकादमियाँ युवाओं को रोजगार की नई दिशा दे रहे हैं। सेना और पैरा-मिलिट्री में भर्ती होने की सबसे अधिक संख्या उत्तराखण्ड से ही आती है। पहाड़ी युवाओं की फुर्ती, अनुशासन और साहस उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में विशेष स्थान दिलाता है। सरकारी सेवाओं, शिक्षा, बैंकिंग, इंजीनियरिंग और प्रशासनिक सेवाओं में भी उत्तराखण्ड के युवा लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं।
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करियर के साथ-साथ उत्तराखण्ड आज बॉलीवुड और भारतीय मनोरंजन उद्योग का एक महत्वपूर्ण स्रोत बन गया है। यहां की वादियाँ, मंदिर, नदियाँ, जंगल और बर्फ से ढकी चोटियाँ फिल्मनिर्माताओं के लिए प्राकृतिक स्टूडियो की तरह हैं। मसूरी, नैनीताल, टिहरी, उत्तरकाशी और चमोली जैसे स्थान फिल्मों की शूटिंग के पसंदीदा स्थल बन चुके हैं। राज्य सरकार भी फिल्म नीति के माध्यम से शूटिंग को बढ़ावा दे रही है, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिलता है और पर्यटन भी बढ़ता है। यही कारण है कि कई फिल्मों, वेब सीरीज़ और संगीत एल्बमों में उत्तराखण्ड की खूबसूरती साफ दिखाई देती है।
लेकिन केवल लोकेशन ही नहीं, उत्तराखण्ड ने बॉलीवुड को नई प्रतिभाएँ भी दी हैं। प्रख्यात गायक जुबिन नौटियाल, अभिनेता राजेश शर्मा, लेखक अनूप जलोटा, अभिनेत्री हंसी Parmar जैसे कई नाम उत्तराखण्ड की मिट्टी से जुड़े हैं। संगीत की परंपरा भी यहां बेहद मजबूत है—लोकगीत, जगर, रणभेरी, ढोल-दमाऊं और लोकनृत्य आज भी उत्तराखण्ड के हर संगीतकार को आधार प्रदान करते हैं। यही कारण है कि आज बॉलीवुड के कई गाने पहाड़ी धुनों से प्रेरित होकर बनाए जा रहे हैं। सोशल मीडिया और यूट्यूब के दौर में उत्तराखण्ड के लोक कलाकारों को अपने कौशल दिखाने का नया मंच भी मिला है।
उत्तराखण्ड की युवाशक्ति का सबसे बड़ा गुण है—अपनी जड़ों से जुड़ा रहना। पहाड़ के लोग जहां भी जाते हैं, अपनी संस्कृति, भाषा और जीवन-मूल्य साथ लेकर चलते हैं। यही कारण है कि बॉलीवुड और मनोरंजन उद्योग में भी उत्तराखण्डी संस्कृति का प्रभाव बढ़ रहा है। फिल्मों में गढ़वाली और कुमाऊँनी बोली की झलक, पहाड़ी जीवन पर आधारित कहानियाँ, गांवों की संस्कृति पर बन रही डॉक्युमेंट्री और स्थानीय कलाकारों की बढ़ती भागीदारी यह साबित करती है कि उत्तराखण्ड सिर्फ दर्शनीय स्थल नहीं, बल्कि एक ‘सांस्कृतिक शक्ति’ बन चुका है।
भविष्य की दृष्टि से उत्तराखण्ड के पास असीम संभावनाएँ हैं। शिक्षा और करियर के क्षेत्र में और अधिक संस्थानों की स्थापना, स्थानीय उद्योगों को प्रोत्साहन, युवाओं के लिए स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम, पर्यटन और फिल्म उद्योग में नई नीतियाँ, और डिजिटल क्रिएटर्स को बढ़ावा जैसे कदम राज्य को राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक मजबूत बनाएंगे। पहाड़ से मैदान और मैदान से महानगर तक पहुंचने का सपना अब केवल कुछ लोगों तक सीमित नहीं—उत्तराखण्ड का हर युवा खुद को साबित कर रहा है।
अंततः, उत्तराखण्ड करियर, संस्कृति और बॉलीवुड तीनों क्षेत्रों में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर चुका है। यहां की मिट्टी प्रतिभा को जन्म देती है, संघर्ष उसे पंख देता है और संस्कृति उसे दिशा देती है। यही कारण है कि उत्तराखण्ड आज केवल एक भौगोलिक राज्य नहीं, बल्कि प्रेरणा, ऊर्जा और नई संभावनाओं का प्रतीक बन चुका है।







