
उत्तराखंड सरकार ने सार्वजनिक स्थानों पर जुआ खेलने और जुआघर चलाने पर सख्त कार्रवाई के लिए नया विधेयक मंजूर किया है। प्रस्तावित कानून में दोषियों के लिए तीन महीने से पांच साल तक जेल और पांच हजार से दस लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान रखा गया है। इसके साथ ही धामी कैबिनेट ने नेपाली अकादमी को भाषा संस्थान में शामिल करने और कई अन्य प्रशासनिक संशोधनों को भी मंजूरी दी है।
- उत्तराखंड में जुआघर चलाने वालों पर सख्ती, कैबिनेट ने पास किया नया विधेयक
- धामी कैबिनेट के बड़े फैसले, जुआ-सट्टेबाजी पर कड़ा कानून लागू होगा
- उत्तराखंड में सार्वजनिक जुआ पर लगेगी रोक, पांच साल तक जेल की सजा संभव
- कैबिनेट बैठक में कई अहम फैसले, नेपाली अकादमी को भी मिली मंजूरी
देहरादून | उत्तराखंड में जुआ खेलने और जुआघर संचालित करने वालों के खिलाफ अब कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami की अध्यक्षता में हुई राज्य कैबिनेट बैठक में उत्तराखंड सार्वजनिक द्यूत रोकथाम विधेयक-2026 को मंजूरी दे दी गई है। इस विधेयक में जुआ और सट्टेबाजी से जुड़ी गतिविधियों में शामिल लोगों के लिए सख्त सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
कैबिनेट की मंजूरी के बाद इस विधेयक को आगामी विधानसभा सत्र में सदन के पटल पर रखा जाएगा। राज्य सरकार का मानना है कि नए कानून से सार्वजनिक स्थानों पर होने वाली जुआ गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी और इससे अपराध पर भी नियंत्रण पाने में मदद मिलेगी। नए विधेयक के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति सड़क, गली या किसी सार्वजनिक स्थान पर जुआ खेलते हुए पकड़ा जाता है तो उसे तीन महीने तक की साधारण कारावास की सजा या पांच हजार रुपये तक जुर्माना अथवा दोनों दंड दिए जा सकते हैं।
इसी तरह यदि कोई व्यक्ति अपने घर या किसी अन्य स्थान पर जुआ खेलने की व्यवस्था करता है, तो उसके लिए दो साल तक की जेल या दस हजार रुपये तक जुर्माने का प्रावधान रखा गया है। सबसे सख्त सजा जुआघर संचालित करने या संगठित तरीके से सट्टेबाजी चलाने वालों के लिए तय की गई है। ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर पांच साल तक की जेल और एक लाख रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है। वहीं संगठित सिंडीकेट के रूप में जुआ या सट्टेबाजी का संचालन करने पर तीन से पांच साल तक की सजा और अधिकतम 10 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
वर्तमान में राज्य में केंद्र सरकार का वर्ष 1867 का गैंबलिंग एक्ट लागू है, जिसमें जुआ खेलने और जुआघर चलाने पर अपेक्षाकृत मामूली जुर्माने का प्रावधान है। राज्य सरकार का मानना है कि यह कानून वर्तमान परिस्थितियों में पर्याप्त प्रभावी नहीं है। इसी कारण राज्य सरकार ने अधिक कड़े प्रावधानों वाला नया कानून लाने का निर्णय लिया है। कैबिनेट बैठक में एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए उत्तराखंड भाषा संस्थान अधिनियम 2018 में संशोधन को भी मंजूरी दी गई। इस संशोधन के तहत राज्य के भाषा संस्थान में नेपाली अकादमी को भी शामिल किया जाएगा। अभी तक संस्थान में हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू और पंजाबी भाषाओं को स्थान दिया गया था।
सरकार का कहना है कि इस निर्णय से राज्य में नेपाली भाषा और साहित्य को बढ़ावा मिलेगा तथा नेपाली भाषी समुदाय की सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूती मिलेगी। कैबिनेट ने उत्तराखंड निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक को भी मंजूरी दी है। इसके तहत नैनीताल जिले में तुलाज और शिवालिक विश्वविद्यालय नाम से निजी विश्वविद्यालय स्थापित किए जाने का रास्ता साफ हो गया है। सरकार का मानना है कि इससे राज्य में उच्च शिक्षा के नए अवसर उपलब्ध होंगे और छात्रों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं मिलेंगी।
कैबिनेट बैठक में उत्तराखंड अल्पसंख्यक आयोग (संशोधन) विधेयक 2026 को भी मंजूरी दी गई। इस संशोधन के तहत आयोग के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों का कार्यकाल पांच वर्ष से घटाकर तीन वर्ष कर दिया गया है। राज्य में अल्पसंख्यक समुदायों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा और उनके सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वर्ष 2002 में अल्पसंख्यक आयोग का गठन किया गया था। कैबिनेट ने भूतपूर्व सैनिकों को सरकारी नौकरियों में आरक्षण के संबंध में भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। वर्ष 2020 में जारी शासनादेश के अनुसार यदि कोई भूतपूर्व सैनिक एक बार आरक्षण का लाभ लेकर सरकारी नौकरी प्राप्त कर लेता है तो वह भविष्य में किसी अन्य सरकारी पद के लिए दोबारा आरक्षण का दावा नहीं कर सकता।
इस प्रावधान पर हाईकोर्ट ने कानून बनाने के निर्देश दिए थे। अब कैबिनेट ने शासनादेश की जगह अधिनियम बनाने का फैसला किया है, जिससे इस व्यवस्था को कानूनी रूप दिया जा सकेगा। कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई इस कैबिनेट बैठक में कानून-व्यवस्था, शिक्षा, भाषा संरक्षण और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। सरकार का दावा है कि इन फैसलों से राज्य में बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था और सामाजिक संतुलन कायम करने में मदद मिलेगी।






