
उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद में जमीन कब्जा हटाने के नाम पर दरोगा द्वारा घूस लेने का मामला सामने आया है। आरोपी ने अपने बेटे के खाते में कई किस्तों में 1.75 लाख रुपये ट्रांसफर कराए, जबकि नकद रकम भी ली गई। शिकायत के बाद पुलिस ने FIR दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और जांच जारी है।
- जमीन कब्जा हटाने के नाम पर पुलिसकर्मी ने वसूले लाखों
- 15 ट्रांजेक्शन में 1.75 लाख की घूस, दरोगा पर कार्रवाई
- प्रधान की शिकायत पर खुला भ्रष्टाचार का मामला
- बेटे के खाते में मंगाए रुपये, पुलिस अधिकारी गिरफ्तार
फर्रुखाबाद। फर्रुखाबाद जिले में भ्रष्टाचार का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां जमीन कब्जा मुक्त कराने के नाम पर पुलिस विभाग के एक दरोगा ने ग्राम प्रधान से लाखों रुपये की घूस ली। इस प्रकरण में आरोपी दरोगा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि मामले की विस्तृत जांच जारी है। जानकारी के अनुसार, मोहम्मदाबाद थाना क्षेत्र के निसाई गांव में ग्रामसभा की जमीन पर अवैध कब्जा हटाने के एवज में दरोगा ने ग्राम प्रधान से पैसे की मांग की। आरोप है कि दरोगा ने सीधे अपने खाते में पैसे लेने के बजाय अपने बेटे के खाते में रकम ट्रांसफर करवाई, ताकि लेन-देन को छिपाया जा सके।
ग्राम प्रधान गीता देवी ने इस मामले की शिकायत कानपुर में उच्च अधिकारियों से की। उन्होंने अपर पुलिस महानिदेशक के समक्ष लिखित शिकायत के साथ 15 अलग-अलग डिजिटल ट्रांजेक्शन के स्क्रीनशॉट भी प्रस्तुत किए, जिनमें कुल 1.75 लाख रुपये बेटे के खाते में भेजे जाने के प्रमाण थे। इसके अतिरिक्त 75 हजार रुपये नकद देने का भी आरोप लगाया गया है। शिकायत में यह भी कहा गया कि जमीन कब्जा हटाने के लिए पहले संबंधित अधिकारियों से कई बार गुहार लगाई गई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। जब मामले को उच्च स्तर तक ले जाने की बात कही गई, तब कथित रूप से दरोगा ने दबाव बनाते हुए पैसे की मांग की और किस्तों में रकम अपने बेटे के खाते में मंगवाई।
इस गंभीर शिकायत के बाद पुलिस विभाग हरकत में आया और फतेहगढ़ कोतवाली में आरोपी दरोगा के खिलाफ भ्रष्टाचार की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया। अधिकारियों के अनुसार, डिजिटल लेन-देन के पुख्ता सबूत मिलने के बाद यह कार्रवाई की गई है। अपर पुलिस अधीक्षक ने बताया कि आरोपी दरोगा के खिलाफ विधिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है और मामले की जांच जारी है। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि इस प्रकरण में अन्य कोई व्यक्ति या नेटवर्क शामिल तो नहीं है।
इस घटना ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं, खासकर तब जब शिकायत के बावजूद पहले कार्रवाई नहीं हुई। पीड़ित पक्ष ने मामले को आगे भी उठाने की बात कही है और जरूरत पड़ने पर उच्च स्तर पर न्याय की मांग करने का संकेत दिया है। यह मामला एक बार फिर यह दर्शाता है कि सरकारी तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना कितना आवश्यक है, ताकि आम नागरिकों का विश्वास बना रहे और भ्रष्टाचार पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सके।







