
बांदा की विशेष पॉक्सो अदालत ने 34 बच्चों के यौन शोषण और अश्लील सामग्री डार्कवेब पर बेचने के मामले में निलंबित जेई और उसकी पत्नी को फांसी की सजा सुनाई है। जांच इंटरपोल की शिकायत के बाद शुरू हुई और 74 गवाहों की गवाही व अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन सामने आए। अदालत ने पीड़ित बच्चों को 10-10 लाख रुपये मुआवजा देने का भी निर्देश दिया।
- डार्कवेब के जरिए विदेशों में बेचते थे अश्लील सामग्री
- विशेष पॉक्सो अदालत ने बताया ‘दुर्लभ से दुर्लभतम’ अपराध
- सीबीआई की 990 पन्नों की चार्जशीट से खुला जाल
- पीड़ित बच्चों को 10-10 लाख मुआवजा देने का आदेश
बांदा | उत्तर प्रदेश के बांदा में एक जघन्य बाल यौन शोषण मामले में विशेष अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की जांच के आधार पर विशेष पॉक्सो अदालत ने निलंबित जूनियर इंजीनियर रामभवन कुशवाहा और उसकी पत्नी दुर्गावती को 34 नाबालिग बच्चों के यौन शोषण तथा उनकी अश्लील सामग्री डार्कवेब के जरिए विदेशों में बेचने का दोषी पाते हुए फांसी की सजा सुनाई।
विशेष पॉक्सो न्यायाधीश प्रदीप कुमार मिश्रा ने 163 पृष्ठों के फैसले में इस अपराध को ‘दुर्लभ से दुर्लभतम’ श्रेणी का बताया। अदालत ने कहा कि दोषियों के आचरण में सुधार की कोई संभावना नहीं दिखती और समाज में कड़ा संदेश देने के लिए मृत्युदंड आवश्यक है। साथ ही, राज्य सरकार को प्रत्येक पीड़ित बच्चे को 10-10 लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया गया। आरोपियों पर लाखों रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।
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इंटरपोल की शिकायत से शुरू हुई जांच
मामले का खुलासा तब हुआ जब इंटरपोल से दिल्ली स्थित सीबीआई मुख्यालय को ई-मेल के माध्यम से शिकायत मिली। शिकायत में आरोप था कि आरोपी डार्कवेब के जरिए बच्चों के अश्लील वीडियो और तस्वीरें विदेशों में बेच रहा है। इंटरपोल 195 देशों में सक्रिय है और इस सूचना के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समन्वय शुरू हुआ।
सीबीआई ने महीनों तक तकनीकी और भौतिक साक्ष्य जुटाए। 16 नवंबर 2020 को चित्रकूट स्थित आरोपी के आवास पर छापा मारकर दंपती को गिरफ्तार किया गया। जांच के दौरान 10 मोबाइल फोन, दो लैपटॉप, मेमोरी कार्ड, पेन ड्राइव, डिजिटल कैमरा और भारी मात्रा में आपत्तिजनक सामग्री बरामद हुई। पेन ड्राइव में 34 वीडियो और 679 तस्वीरें मिलीं।
74 गवाह, 47 देशों का कनेक्शन
मामले में 74 गवाहों की गवाही दर्ज की गई। जांच में सामने आया कि आरोपी दंपती ने तीन जिलों के बच्चों के अलावा अपने रिश्तेदारों तक को निशाना बनाया। अश्लील सामग्री रूस, अमेरिका, लंदन और ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों में भेजी गई थी। कुल 47 देशों से जुड़े डिजिटल सुराग सामने आए। अदालत ने टिप्पणी की कि सभी पीड़ितों की उम्र तीन से 18 वर्ष से कम थी और इस अपराध ने मानवता को शर्मसार किया है। फैसले के बाद दोषियों ने उच्च न्यायालय में अपील करने की बात कही है।
यह मामला न केवल बाल सुरक्षा से जुड़े गंभीर खतरे को उजागर करता है, बल्कि साइबर अपराध और डार्कवेब के दुरुपयोग की भयावह तस्वीर भी सामने लाता है। अदालत का यह निर्णय ऐसे अपराधों के खिलाफ सख्त न्यायिक रुख और शून्य सहनशीलता नीति का संकेत माना जा रहा है।








