
आम बजट 2026 से उत्तराखंड को विशेष भौगोलिक परिस्थितियों और पारिस्थितिक संवेदनशीलता के अनुरूप बड़ी घोषणाओं की उम्मीद है। राज्य सरकार ने केंद्र के समक्ष अवस्थापना विकास, जल विद्युत, पर्यटन, आपदा प्रबंधन और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी अहम मांगें रखी हैं। आगामी महाकुंभ और विकास परियोजनाओं को देखते हुए विशेष वित्तीय प्रावधान की संभावना जताई जा रही है।
- महाकुंभ और आधारभूत ढांचे के लिए विशेष प्रावधान की मांग
- जल विद्युत परियोजनाओं के लिए 8 हजार करोड़ की वीजीएफ अपेक्षित
- आपदा और मानव-वन्यजीव संघर्ष पर भी बजट की आस
- पेंशन, आंगनबाड़ी और रेल परियोजनाओं पर निगाह
देहरादून। केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले आम बजट 2026 से उत्तराखंड को विशेष उम्मीदें हैं। प्रदेश सरकार ने राज्य की विशिष्ट भौगोलिक परिस्थितियों, पारिस्थितिक संवेदनशीलता और राष्ट्र को प्रदान की जा रही महत्वपूर्ण इको-सिस्टम सेवाओं को ध्यान में रखते हुए केंद्र के समक्ष कई महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं। माना जा रहा है कि इस बार का बजट उत्तराखंड के लिए विकास की नई दिशा तय कर सकता है। प्रदेश सरकार को आगामी वर्ष होने वाले महाकुंभ को लेकर आधारभूत अवसंरचना के विकास एवं अनुरक्षण के लिए विशेष वित्तीय प्रावधान की उम्मीद है।
इसके साथ ही अवस्थापना विकास, जल विद्युत परियोजनाओं के लिए व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (वीजीएफ) योजना तथा लघु और मध्यम उद्योगों के लिए भी बड़ी सौगात मिलने की संभावना जताई जा रही है। राज्य ने केंद्र सरकार से स्कीम फॉर स्पेशल असिस्टेंस टू स्टेट्स फॉर कैपिटल इन्वेस्टमेंट को जारी रखने की मांग की है। साथ ही बढ़ती फ्लोटिंग पॉपुलेशन को देखते हुए सतत पर्यटन के लिए नई केंद्र पोषित योजना लागू किए जाने का अनुरोध किया गया है। भूजल स्तर में लगातार हो रही गिरावट को रोकने के लिए राज्य के प्रयासों को प्रोत्साहित करने हेतु विशेष अनुदान या नई केंद्र पोषित योजना की भी मांग रखी गई है।
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जल जीवन मिशन के अंतर्गत प्रदेश में लगभग 1100 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आवश्यकता बताई गई है, जबकि इस योजना की अवधि भी समाप्त होने जा रही है। ऐसे में राज्य को उम्मीद है कि बजट में न केवल अतिरिक्त धनराशि का प्रावधान होगा, बल्कि योजना की अवधि भी बढ़ाई जाएगी। इसके अलावा दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में जल विद्युत परियोजनाओं के लिए दो करोड़ रुपये प्रति मेगावाट की दर से कुल 8,000 करोड़ रुपये की वायबिलिटी गैप फंडिंग की मांग की गई है।
आपदा की दृष्टि से संवेदनशील उत्तराखंड में हर वर्ष होने वाले भारी नुकसान को देखते हुए राज्य ने पुनर्निर्माण की पूरी राशि एसडीआरएफ से वहन किए जाने का अनुरोध किया है। वहीं नीलगाय, जंगली सूअर, भालू और बंदरों से फसलों को हो रहे नुकसान को रोकने के लिए कृषि सुरक्षा एवं मानव-वन्यजीव संघर्ष के तहत क्लस्टर आधारित तारबंदी की नई योजना की भी मांग केंद्र के समक्ष रखी गई है। इसके अतिरिक्त डिजिटल संप्रभुता और आत्मनिर्भर भारत के विजन के तहत स्टेट डाटा सेंटर्स को सुदृढ़ करने के लिए केंद्र पोषित योजना, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे नेटवर्क की पूर्णता हेतु बागेश्वर-कर्णप्रयाग और रामनगर-कर्णप्रयाग रेललाइन के सर्वेक्षण, वृद्धावस्था पेंशन में केंद्रांश बढ़ाने तथा आंगनबाड़ी कर्मियों के मानदेय में वृद्धि जैसी मांगें भी शामिल हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बजट को लेकर आशा व्यक्त करते हुए कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उत्तराखंड की आवश्यकताओं और चुनौतियों को भली-भांति समझते हैं और इस बार भी राज्य को विशेष ध्यान दिए जाने की उम्मीद है। अब सबकी निगाहें आम बजट पर टिकी हैं, जिससे उत्तराखंड को विकास की नई गति मिलने की संभावना है।








