
देहरादून में उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने 2026-27 के लिए बिजली दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं की, जिससे उपभोक्ताओं को राहत मिली है। राज्य गठन के बाद यह तीसरी बार है जब शून्य टैरिफ लागू किया गया है। इससे पहले 2006-07 और 2014-15 में भी आयोग ने दरें स्थिर रखी थीं।
- बिजली दरों में राहत: आयोग ने नहीं बढ़ाया टैरिफ
- 2026-27 के लिए बिजली दरें स्थिर, उपभोक्ताओं को फायदा
- राज्य गठन के बाद फिर शून्य टैरिफ, आयोग का बड़ा फैसला
- बिजली बिल नहीं बढ़ेगा, उत्तराखंड में उपभोक्ताओं को राहत
देहरादून: उत्तराखंड में बिजली उपभोक्ताओं को इस वर्ष बड़ी राहत मिली है। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बिजली दरों में किसी भी प्रकार की बढ़ोतरी नहीं करने का फैसला लिया है। राज्य गठन के बाद यह तीसरी बार है जब आयोग ने शून्य टैरिफ लागू किया है, जिससे लाखों उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा। आयोग द्वारा इससे पहले वर्ष 2006-07 और 2014-15 में भी बिजली दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई थी।
वर्ष 2003 में राज्य में पहला टैरिफ आदेश जारी हुआ था, जिसमें घरेलू उपभोक्ताओं के लिए कोई फिक्स चार्ज नहीं रखा गया था और बिजली दरें खपत के आधार पर 1.80 से 2.50 रुपये प्रति यूनिट तक निर्धारित थीं। वहीं, व्यावसायिक उपभोक्ताओं के लिए दरें तीन से साढ़े तीन रुपये प्रति यूनिट के बीच तय की गई थीं। समय के साथ बिजली दरों में हर साल कुछ न कुछ बढ़ोतरी होती रही, लेकिन इस बार आयोग ने उपभोक्ताओं को राहत देने के उद्देश्य से दरें स्थिर रखने का निर्णय लिया है।
गौरतलब है कि वर्ष 2009-10 में बिजली दरों में सर्वाधिक लगभग 17 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी, जबकि हाल के वर्षों में भी अलग-अलग प्रतिशत से बढ़ोतरी होती रही है। आंकड़ों के अनुसार, राज्य गठन के शुरुआती दौर में वर्ष 2003 में 2801 गांव ऐसे थे जहां बिजली नहीं पहुंची थी और केवल 30 प्रतिशत घरों में ही बिजली कनेक्शन था। उस समय आयोग ने सभी गांवों तक बिजली पहुंचाने और 100 प्रतिशत मीटरिंग का लक्ष्य तय किया था।
आज स्थिति काफी बदल चुकी है और प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं की संख्या 29 लाख से अधिक हो गई है। इस फैसले से न केवल घरेलू बल्कि व्यावसायिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं को भी राहत मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती महंगाई के बीच बिजली दरों को स्थिर रखना आम जनता के लिए बड़ी राहत साबित होगा।





