
अल्मोड़ा की एक महिला से साइबर ठगों ने खुद को ट्राई अधिकारी बताकर डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 1.20 करोड़ रुपये ठग लिए। लगातार डर और दबाव बनाकर ठगों ने महिला से बैंक खाते की पूरी रकम एक कथित सीक्रेट अकाउंट में ट्रांसफर करा ली।
- अनजान कॉल से शुरू हुआ साइबर जाल, हफ्तों तक डर में रही महिला
- सीक्रेट सुपरविजन अकाउंट के नाम पर कराई गई भारी रकम ट्रांसफर
- आईसीआईसीआई बैंक खाते में भेजे गए रुपये, जांच में जुटी साइबर पुलिस
- डिजिटल अरेस्ट की नई चाल से बढ़ रही साइबर ठगी की घटनाएं
अल्मोड़ा। साइबर अपराधियों ने एक बार फिर डिजिटल अरेस्ट की नई तरकीब अपनाकर बड़ी ठगी को अंजाम दिया है। अल्मोड़ा निवासी एक महिला, जो एक आश्रम से जुड़ी बताई जा रही है, से ठगों ने खुद को टेलीकॉम रेग्युलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) का अधिकारी बताकर 1.20 करोड़ रुपये की ठगी कर ली।
पीड़िता ने साइबर पुलिस को बताया कि 11 दिसंबर को उनके व्हाट्सएप पर एक अनजान कॉल आया। कॉल करने वाले व्यक्ति ने दावा किया कि वह ट्राई का अधिकारी है और महिला के खाते में पांच हजार से अधिक संदिग्ध लेन-देन हुए हैं। उसने यह भी कहा कि जिन लोगों ने पैसे ट्रांसफर किए हैं, उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज हो चुकी है। यह सुनकर महिला घबरा गई।
आरोप है कि इसके बाद ठग ने 11 दिसंबर से 6 जनवरी तक लगातार महिला से संपर्क बनाए रखा। इस दौरान उसने महिला को किसी से भी बातचीत न करने की सख्त हिदायत दी और मानसिक दबाव बनाते हुए उसे तथाकथित “डिजिटल अरेस्ट” में रख लिया। ठग ने जांच का हवाला देते हुए महिला से कहा कि उसके बैंक खाते में मौजूद पूरी रकम एक “सीक्रेट सुपरविजन अकाउंट” में ट्रांसफर करनी होगी।
ठग की बातों में आकर महिला ने 31 दिसंबर को अपने एचडीएफसी बैंक खाते से 1.20 करोड़ रुपये आईसीआईसीआई बैंक के बताए गए खाते में ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद जब संपर्क टूट गया और मामला संदिग्ध लगा, तब जाकर महिला को साइबर ठगी का अहसास हुआ।
मामले की जानकारी मिलने पर साइबर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। थाना प्रभारी अरुण कुमार ने बताया कि जिन बैंक खातों में रुपये ट्रांसफर किए गए हैं, उनकी गहन जांच की जा रही है। साइबर अपराधियों की पहचान और रकम की रिकवरी के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।
पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि किसी भी सरकारी अधिकारी के नाम से आने वाले अनजान कॉल या डिजिटल अरेस्ट जैसी धमकियों से सतर्क रहें और बिना सत्यापन किसी भी खाते में धनराशि ट्रांसफर न करें। यह मामला एक बार फिर साइबर अपराधियों की बढ़ती चालाकी और डिजिटल जागरूकता की जरूरत को उजागर करता है।





