
यह आलेख नये साल के दिखावटी जश्न के बजाय रोजमर्रा के जीवन में संयम, नैतिकता और पारिवारिक समय को अपनाने का संदेश देता है। लेखक के अनुसार सच्ची खुशियां संकल्प, प्रेम और सकारात्मक जीवनशैली से ही आती हैं।
- एक दिन का जश्न नहीं, रोजमर्रा की खुशहाली जरूरी
- नये वर्ष पर संकल्प जो जीवन बदल दें
- परिवार, संयम और संस्कार से खुशहाल जीवन
- अणुव्रत और नैतिक मूल्यों से घर बने स्वर्ग
सुनील कुमार माथुर
31 दिसम्बर को हर वर्ष लोग घरों से बाहर रहकर देर रात्रि में होटलों व क्लबों में जश्न मनाते हैं। घर-परिवार के सदस्यों को छोड़कर दोस्तों के संग नाच-गान करते हैं। शराब पीते हैं और देर रात्रि में या फिर सवेरे-सवेरे घर लौटते हैं। जश्न मनाना कोई बुरी बात नहीं है। हर रोज मनाइये। कोई भी आपको रोकने-टोकने वाला नहीं है। मगर नये साल के बहाने नाच-गाने व शराब का सेवन कर नये साल को बदनाम मत कीजिए।
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नये साल के बहाने आपको खुशियां मनानी हैं तो नये वर्ष पर संकल्प लीजिए कि आज से मैं शराब का सेवन नहीं करूंगा, हिंसा नहीं करूंगा, हर वर्ष एक पौधा लगाऊंगा, भ्रष्टाचार से दूर रहूंगा, चोरी-चकारी नहीं करूंगा, दीन-दुखियों की सेवा करूंगा, अपने माता-पिता व बड़े-बुजुर्गों को समय दूंगा और दिन में एक बार कम से कम उनके संग बैठकर भोजन करूंगा। बच्चों को मोबाइल से दूर रहने की सीख देने के साथ-साथ मैं भी मोबाइल से दूरी बनाए रखूंगा।
इसी के साथ अणुव्रत के नियमों का पालन करते हुए नैतिक मूल्यों, मानवीय मूल्यों और चारित्रिक विकास को प्रोत्साहित करने का संकल्प लें। इससे जीवन में जहां एक ओर सकारात्मक सोच विकसित होगी, वहीं दूसरी ओर घर-घर में खुशियां छा जाएंगी। जब आप हर रोज अपने परिजनों को समय देंगे और उनके साथ भोजन करेंगे, तभी घर स्वर्ग बन जाएगा। प्रेम और स्नेह का साम्राज्य स्थापित होगा और नये साल का आनंद आप पूरे साल अपने परिवार के साथ उठा सकेंगे।
अगर आप ऐसा करते हैं तो घर में हर रोज खुशियां ही खुशियां होंगी। बस जरूरत है अपने से ही पहल करने की। नया साल आने वाला है और इसी साल से इस बात पर अमल कीजिए और जीवन को खुशहाल बनाइये।
सुनील कुमार माथुर
सदस्य, अणुव्रत लेखक मंच, स्वतंत्र लेखक व पत्रकार, जोधपुर, राजस्थान








