
सुनील कुमार माथुर
अंहकार ही विनाश का कारण है । अतः अंहकार से सदैव दूर रहें । अंहकारी व्यक्ति अंहकार के कारण अपना तो नुकसान करता ही हैं। साथ ही साथ वआह दूसरों का भी नुकसान करता है । अतः अंहकार का त्याग करें और जीवन को महकाए । इसके लिए दया , करुणा , ममता , स्नेह , वात्सल्य , भाईचारा व प्रेम का भाव जागृत कर सबसे स्नेह पूर्वक व्यवहार कीजिये और अपने जीवन की महक सर्वत्र फैलाए।
आपकी सज्जनता ही आपके व्यक्तिव की पहचान है जिसका जीवन जितना करुणामय होता है वह उतना ही सबका प्रिय होता है जबकि अंहकारी व्यक्ति से हर कोई दूर भागता है । हरे भरे वृक्ष फलों व फूलों से लद जाते है तो झुक कर हमें फल और खुशबू वाले फूल देते है तो क्या हम तो परमात्मा के भक्त हैं । अनुभवी व्यक्ति है । शिक्षित हैं । बुद्धजीवी है तो फिर क्या हम किसी जरुरतमंद की समय पर मदद भी न कर सके तो कैसे परमात्मा के भक्त हैं और कैसे शिक्षित और बुद्धजीवी है।
हमें समय के अनुसार चलना चाहिए व जहां किसी जगह किसी को मदद की जररूत पडे तो जरुरतमंद की मदद करने से नहीं चुकना चाहिए आप किसी की अधिक मदद नहीं कर सकते तो अपने सामर्थ्य के अनुसार तो कर ही सकते है । हो सकता हैं कि हम जिसे थोडी सी या छोटी सी मदद समझ रहे हैं वह सामने वाले के लिए बहुत बडी हो सकती हैं । अतः मददगार बने न कि स्वार्थी।
मनुष्य को हर वक्त बकवास नहीं करनी चाहिए अपितु जहां जरुरत हो वहीं बोले और उतना ही बोले जितने की जरुरत है । अनावश्यक न बोले जीवन में कभी भी अपनी प्रशंसा के चक्कर में न पडे। झूठी प्रशंसा हमें हमारे विनाश की ओर ले जाती है । अगर प्रशंसा करनी ही हो तो फिर सही समय पर व सही जगह पर अवश्य कीजिये।
¤ प्रकाशन परिचय ¤
![]() | From »सुनील कुमार माथुरस्वतंत्र लेखक व पत्रकारAddress »33, वर्धमान नगर, शोभावतो की ढाणी, खेमे का कुआ, पालरोड, जोधपुर (राजस्थान)Publisher »देवभूमि समाचार, देहरादून (उत्तराखण्ड) |
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