
यह आलेख बाहरी यात्राओं से आगे बढ़कर “स्व की खोज” की आंतरिक यात्रा पर बल देता है। आत्मचिंतन, प्रकृति, अध्यात्म और संगीत के माध्यम से स्वयं को समझने और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने का संदेश दिया गया है।
- स्वयं को जानने का सफर
- भीतरी यात्रा की ओर
- आत्मचिंतन और प्रकृति
- जीवन की असली खोज
आशी प्रतिभा
ग्वालियर, मध्य प्रदेश
जीवन में कुछ यात्राएं हम स्वयं को खुश रखने के लिए करते हैं, वही हम एक ही जीवन शैली जीते-जीते जब उबाऊ महसूस करते हैं तब नवीनता के लिए भी करते हैं। इन यात्राओं में प्रकृति प्रेमी प्रकृति के पास एवं रोमांच प्रेमी रोमांचकारी जगह पर जाकर आनंदित महसूस करते हैं, परंतु क्या कभी सोचा है जीवन में यात्राओं के अलावा भी एक यात्रा है “स्व की खोज” की यात्रा! हाँ सही पहचाना, यहाँ मैं आप सभी के समकक्ष एक ऐसी यात्रा प्रस्तुत कर रही हूं!
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हर व्यक्ति का स्वभाव अलग है ऐसा मुझे प्रतीत होता है, हर किसी की ऊर्जा अलग है, स्वाभाविक है हम दिन भर जिस प्रकार के कार्य करते हैं हमारी ऊर्जा वैसे ही हो जाती है। हम अपने व्यवहार, अपनी दैनिक दिनचर्या को महसूस नहीं करते और हमारा खुद का ओरा मंडल बन जाता है, कहने का अर्थ हम जैसा विचार रखते हैं वैसे ही हमारा ओरा मंडल भी होता है। हम खुद को पहचान या खुद की बात नहीं करते, हम हमेशा दूसरों की बात करते हैं, दूसरों के बारे में विचार करते हैं और दिनभर व्यर्थ यूं ही बिता देते हैं,,,,,
आज आपको खुद की यात्रा पर ले चले,,, आपने दिन भर क्या किया, किस्से बात की, किसकी बात सुनी और इन सब का आप पर क्या प्रभाव हुआ नकारात्मक या सकारात्मक यह चिंतन के योग्य है और यही चिंतन आपको प्रभावशाली बनाता है। स्वयं की खोज के लिए जो भी करना चाहते हैं वह आपके व्यवहार में शामिल है, कुछ लोग बस जीवन यूं ही जी रहे हैं परंतु उनका खुद के लिए समय नहीं, परंतु यह इतना कठिन भी नहीं। हम दिन भर जो भी काम करते हैं उन्हें समझे तो स्वयं को छोटी-छोटी बातों से जानने का अवसर मिल जाएगा।
स्व की खोज की इस यात्रा में अध्यात्म आपका सारथी है, इसे हमें जरूर अपनाना चाहिए। आध्यात्मिक होने का अर्थ है प्रकृति के समीप रहना, जीवन को मूल्यवान दृष्टिकोण से देखने की कोशिश करना। तब आपको धीरे-धीरे एहसास होने लगेगा कि धार्मिक पुस्तक क्यों सकारात्मक शैली में लिखी जाती है। इनमें लिखी कहानी भी मनगढ़ंत नहीं, कोई ना कोई उदाहरण या समस्याओं के चिंतन से ही समाधान लेकर स्पष्ट नजर आती है! अब आप कहेंगे कि जिन पर समय नहीं है वह आध्यात्मिक कैसे हो सकते हैं, चिंतन कैसे कर सकते हैं? इसके लिए आपको प्रकृति ने संदेश दे रखा है। कभी सोचा है सुबह उठकर आपको कैसा महसूस होता है जब पक्षी कलरव करते हैं, जब ऑक्सीजन से भरपूर पूर्वी हवा चलती है। यह सब भी जीवंत जीवन है। पत्तों की सरसराहट, लालिमा युक्त सूर्योदय यह सब आपको मानसिक शांति देगा,,,,,,
स्व चेतना को जागृत करने के लिए संगीत भी बहुत महत्वपूर्ण है, हमारे मन में दिन भर अनेकों विचार चलते हैं परंतु इन सबसे छुटकारा पाने के लिए हम किसी भी ग्रुप में संगीत सुन सकते हैं। इससे आपके मन मस्तिष्क को शांति मिलती है। इसे सुनने से एक फायदा और होता है, जब हम किसी एक चीज पर अपना ध्यान एकत्रित करते हैं तब हमारे अंदर किसी भी विषय पर चिंतन करने की क्षमता का विकास होता है।
यह सब आपको आपके क्रियाकलापों के लिए ऊर्जा प्रदान करता है, हम भारतीय वैसे भी योग को पूर्व से ही महत्व देते हैं।
हम जितना प्रकृति के समीप रहेंगे उतना खुद को समझने में आसानी रहेगी,,,, हमारी स्व की खोज यही से प्रारंभ होती है।
यह जीवन चक्र भी ऐसा ही है,,,,,,,, एक यात्रा।






