
काशीपुर के राधेहरि राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के बीएड छात्रों को मुख्यमंत्री से गुहार लगाने के बाद भी छात्रवृत्ति नहीं मिल सकी है। ओबीसी, एससी और एसटी वर्ग के करीब 24 छात्र आर्थिक संकट से जूझते हुए विभागीय दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
- डेढ़ साल बाद भी बीएड छात्रों को नहीं मिला हक
- कर्ज लेकर पढ़ाई करने वाले छात्रों की बढ़ी मुश्किल
- समाज कल्याण विभाग के चक्कर काट रहे छात्र
- समाधान न होने पर निदेशालय घेराव की चेतावनी
ऊधम सिंह नगर। सरकार द्वारा शिक्षा और सामाजिक न्याय की लगातार घोषणाओं के बावजूद काशीपुर के राधेहरि राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के बीएड छात्रों को अब तक छात्रवृत्ति नहीं मिल सकी है। मुख्यमंत्री से गुहार लगाए जाने के पखवाड़े भर बाद भी वंचित छात्र-छात्राओं की समस्या जस की तस बनी हुई है। महाविद्यालय के बीएड सत्र 2023–25 और 2024–26 के ओबीसी, एससी और एसटी वर्ग के लगभग 24 छात्र-छात्राएं छात्रवृत्ति से वंचित हैं।
इन छात्रों ने समाज कल्याण विभाग ऊधम सिंह नगर को शिकायती पत्र सौंपने के साथ-साथ अपनी पीड़ा सीएम हेल्पलाइन पोर्टल पर भी दर्ज कराई है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। छात्रों का कहना है कि बीएड पाठ्यक्रम की मान्यता के लिए उन्हें पढ़ाई पूरी करने के बाद भी करीब डेढ़ वर्ष तक लगातार दफ्तरों के चक्कर काटने पड़े। मान्यता में हुई देरी के चलते छात्रवृत्ति की अंतिम तिथि निकल गई, जिसका खामियाजा अब विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है।
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छात्रों ने बताया कि वे कॉलेज प्रशासन, बीएड विभाग, समाज कल्याण विभाग और जनप्रतिनिधियों के कार्यालयों के कई चक्कर लगा चुके हैं, लेकिन हर जगह से उन्हें केवल आश्वासन ही मिले। कई छात्राएं ऐसी हैं जिन्होंने बीएड की फीस कर्ज लेकर जमा की थी। अब छात्रवृत्ति न मिलने से उनके सामने कर्ज चुकाने का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। विद्यार्थियों का आरोप है कि कुछ विभागीय अधिकारी गरीब और वंचित वर्ग के छात्रों की समस्या का समाधान करने के बजाय मामले को दबाने का प्रयास कर रहे हैं।
सरकार जहां ‘सबका साथ, सबका विकास’ की बात करती है, वहीं हकीकत में जरूरतमंद छात्र विभागीय लापरवाही के कारण दर-दर भटकने को मजबूर हैं। बीएड विभागाध्यक्ष डॉ. नीरज शुक्ला ने बताया कि दस दिन पूर्व जिला समाज कल्याण अधिकारी और निदेशक को ईमेल के माध्यम से पत्र भेजा गया था। इसमें स्पष्ट किया गया कि राजभवन से पुराने छात्रों की मान्यता से संबंधित पत्र देरी से आने के कारण छात्रवृत्ति की तिथि निकल गई। पत्र में सत्र 2023–25 और 2024–26 के छात्रों को छात्रवृत्ति दिए जाने का अनुरोध किया गया है।
छात्रों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो वे समाज कल्याण विभाग के निदेशालय का घेराव करने को मजबूर होंगे। इस पूरे मामले ने एक बार फिर छात्रवृत्ति वितरण प्रणाली और विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।





