
सुनील कुमार माथुर
जीवन जीना भी एक कला है और जिसने इस कला को सीख लिया समझों उसने सब कुछ सीख लिया । अतः जीवन में स्वस्थ रहें व मस्त रहें । जीवन में संयम , धैर्य , सहनशीलता , क्षमा , करूणा व वात्सल्य के भाव को अपनाइए । कोई आपको बुरा भी कहे तो चुपचाप सुन लेना चाहिए न कि उस पर क्रोध करें चूंकि जिसके पास जो होगा वही तो कहेगा अतः बिना वजह परेशान न हो।
जीवन में कभी भी अभिमान न करे । कोई आपके बारे में लाख बुरा सोचे पर आप दूसरों के बारे में बुरा न सोचे । दोषी को आप दंड न दे। कानून व परमात्मा अपने आप दंड दे देगे । जीवन में हमारी आलोचना करने वाले ही हमारे सच्चे हितैषी होते है । जो हमें हमारी कमजोरिया बताकर हमें उन्हें सुधारने का सुनहरा अवसर देते है । अतः हमें अपनी कमजोरियां बताने वालों को कभी भी भला बुरा नहीं कहना चाहिए।
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आप अपनी प्रशंसा सुनकर कभी भी फूले न समाए अन्यथा आप अपनी कमियॉ को कभी भी दूर नहीं कर पायेगे । जीवन में तो बस नम्रता और विनम्रता ही होनी चाहिए । हर कार्य सोच समझ कर करें एवं जल्दबाजी में कोई भी कार्य न करे । अन्यथा नुकसान आपका ही होगा। न ही कभी किसी के साथ कोई छल कपट करें।
छल कपट से कमाया गया धन हमें नर्क की ओर धकेलता है। चूंकि बुरे कर्म का फल बुरा ही होता हैं भले ही उस धन से हम कुछ रोज ऐशो आराम में बिता ले लेकिन आखिर जाना तो नर्क मैं ही है। नर्क से बचने हेतु ईमानदारी से धन कमाये व उसे नेक कार्य में लगाये। आपका पुण्य ही आपके साथ जायेगा। अतः सदैव नेक कर्म ही करें।
¤ प्रकाशन परिचय ¤
![]() | From »सुनील कुमार माथुरलेखक एवं कविAddress »33, वर्धमान नगर, शोभावतो की ढाणी, खेमे का कुआ, पालरोड, जोधपुर (राजस्थान)Publisher »देवभूमि समाचार, देहरादून (उत्तराखण्ड) |
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