
- अलीगढ़ में मसाज सेंटर से देह व्यापार का खुलासा
- ग्राहकों की लंबी सूची और आपत्तिजनक सामग्री बरामद
- राजनीतिक संरक्षण के शक से बढ़ी जांच की गंभीरता
अलीगढ़। अलीगढ़ महानगर के रामघाट रोड पर पीएसी मॉल के सामने स्थित एक कॉम्प्लेक्स में चल रहे गंगा स्पा सेंटर पर बुधवार देर शाम पुलिस और प्रशासनिक टीम ने संयुक्त रूप से छापा मारकर देह व्यापार का बड़ा खुलासा किया। लंबे समय से मिल रही गुप्त शिकायतों के आधार पर हुई इस कार्रवाई में पुलिस ने चार युवतियों सहित कुल छह लोगों को गिरफ्तार किया है। छापेमारी के दौरान मिले साक्ष्य इस बात की पुष्टि करते हैं कि मसाज और स्पा की आड़ में यहां सुनियोजित रूप से सेक्स रैकेट चल रहा था। कमरे, संरचना और वहां रखी वस्तुओं से यह स्पष्ट था कि यह केंद्र स्पा या मसाज सेवा के लिए नहीं बल्कि अनैतिक गतिविधियों के संचालन के लिए तैयार किया गया था।
पुलिस को स्थानीय लोगों से लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि दूसरे माले पर बने इस तथाकथित स्पा सेंटर में दिन ढलते ही अनैतिक गतिविधियां बढ़ जाती हैं और संदिग्ध लोगों का आना-जाना काफी बढ़ जाता है। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने एसीएम दिग्विजय सिंह, सीओ तृतीय सर्वम सिंह और क्वार्सी थाना पुलिस की एक टीम को बुधवार शाम मौके पर भेजा। टीम ने पहले एक सामान्य ग्राहक की तरह सेंटर में परिस्थिति का निरीक्षण किया और उसके बाद अचानक अंदर घुसकर छापेमारी शुरू की। टीम के पहुंचते ही अंदर मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई और कई लोग मौके से भागने का प्रयास करने लगे, जिन्हें पुलिस ने तुरंत रोक लिया।
करीब आधे घंटे तक चली तलाशी में टीम को चार छोटे-छोटे कमरे मिले जिनमें सिर्फ एक-एक बिस्तर रखा हुआ था। स्पा या मसाज से संबंधित कोई भी मशीन, तेल, क्रीम या उपचार सामग्री नहीं मिली। इसके बजाय आपत्तिजनक सामग्री, काले रजिस्टर में ग्राहकों की सूची और युवतियों के रहने से जुड़े रिकॉर्ड बरामद कर लिए गए। रिसेप्शन पर मौजूद युवती के पास से 60 से अधिक नियमित और नए ग्राहकों के मोबाइल नंबर मिले, जिनके आधार पर अपॉइंटमेंट तय किए जाते थे। जांच में यह भी सामने आया कि हर ग्राहक से पहले 500 रुपये एंट्री फीस ली जाती थी और उसके बाद अंदर ‘स्पेशल सर्विस’ के नाम पर अतिरिक्त रकम वसूली जाती थी। दोपहर के समय कम भीड़ रहती थी, लेकिन शाम के बाद ग्राहकों की संख्या इतनी बढ़ जाती थी कि कई बार वेटिंग लगती थी।
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पकड़ी गई चार युवतियों में तीन दिल्ली के साकेत क्षेत्र से लाई गई थीं। वे सभी 15-15 हजार रुपये महीने के वेतन पर एक माह की अवधि के लिए बुलाई गई थीं और उन्हें पास की एक इमारत में किराए पर कमरा लेकर रखा गया था। उनका पूरा खर्च सेंटर संचालकों द्वारा ही वहन किया जाता था। रिसेप्शनिस्ट युवती जमालपुर, अलीगढ़ की रहने वाली है और उसका काम फोन रिसीव करके अपॉइंटमेंट तय करना था। पकड़े गए दो युवकों में गाजियाबाद के कवि नगर का सचिन मुख्य संचालक है और उसने पूछताछ में स्वीकार किया कि वह दिल्ली से युवतियों को लाने का काम संभालता था। उसके साझेदार जयदीप के नाम से हॉल किराए पर लिया गया था और स्थानीय संपर्कों के सहारे ग्राहक जुटाए जाते थे। जयदीप छापेमारी से पहले ही फरार हो गया और उसका मोबाइल फोन भी बंद मिला।
पूरे घटनाक्रम के बीच यह बात भी सामने आई कि इलाके में लंबे समय से इस सेंटर को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त होने की चर्चा थी। कई स्थानीय निवासियों ने दबी आवाज़ में बताया कि प्रभावशाली लोगों के कारण वे खुलकर शिकायत नहीं कर पा रहे थे। हालांकि पुलिस के अनुसार छापेमारी के बाद किसी की ओर से किसी भी प्रकार की सिफारिश नहीं आई है, लेकिन संचालकों के राजनीतिक संपर्कों को देखते हुए सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है।
सीओ तृतीय सर्वम सिंह ने बताया कि जो साक्ष्य मिले हैं, उनके आधार पर विस्तृत जांच की जा रही है और संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई आगे बढ़ाई जाएगी। सेंटर को पूरी तरह बंद कर दिया गया है और युवतियों के बयानों के आधार पर दिल्ली और गाजियाबाद में भी जांच की संभावना जताई गई है। पुलिस यह भी सत्यापित कर रही है कि पकड़ी गई युवतियां किसी दबाव में लाई गई थीं या वे जानबूझकर इस गतिविधि का हिस्सा बनी थीं। इस छापेमारी ने शहर में चर्चा का भारी माहौल बना दिया है और स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर राहत है कि लंबे समय से चल रही अनैतिक गतिविधियों पर आखिरकार अंकुश लगा। पुलिस अब ग्राहकों की सूची और कॉल रिकॉर्ड के आधार पर आगे की जांच कर रही है ताकि इस पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सके और इसमें शामिल सभी लोगों की पहचान की जा सके।







