
विनोद सिंह नामदेव “शजर शिवपुरी”
अश्क़ आँखों में भर गया कोई।
देश पर फिर से मर गया कोई ।
जो दिलों से उतर नहीं सकता,
इतना गहरा उतर गया कोई।
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मौत मायूस थक के बैठी है,
करके लम्बा सफर गया कोई।
लौट आने की ख़ुशी में उनके,
अपने ही घर से घर गया कोई।
लोग सब कुछ समेट लेते पर,
उससे पहले बिखर गया कोई।
ज़िंदगी के दयार से गुमसुम,
फिर इधर से उधर गया कोई।
ऐ! ‘शजर’ तू करेगा अब क्या क्या,
तुझसे बेहतर तो कर गया कोई।
¤ प्रकाशन परिचय ¤
![]() | From »विनोद सिंह नामदेव“शजर शिवपुरी”Address »लेखक एवं कवि, इन्दौर (मध्य प्रदेश)Publisher »देवभूमि समाचार, देहरादून (उत्तराखण्ड) |
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