
स्मृति सुमन पुस्तक सोहनलाल कोठारी के बहुआयामी व्यक्तित्व और साहित्यिक कृतित्व का प्रेरणादायी संकलन है। यह ग्रंथ न्याय, साहित्य, समाजसेवा और तेरापंथ परंपरा में उनके योगदान को सशक्त रूप से प्रस्तुत करता है।
- स्मृति सुमन: व्यक्तित्व और कृतित्व का दर्पण
- सोहनलाल कोठारी की स्मृतियों का अनमोल संकलन
- प्रेरणा और मूल्यों से भरपूर स्मृति ग्रंथ
- साहित्य, समाज और साधना का संगम
सुनील कुमार माथुर
सोहनलाल कोठारी की स्मृति में प्रकाशित पुस्तक स्मृति सुमन कोठारी के व्यक्तित्व और कृतित्व का अनूठा खजाना है, चूँकि कोठारी न केवल एक कुशल न्यायाधीश ही थे, अपितु एक सफल अभिभाषक, समाजसेवी, दार्शनिक, तेरापंथ के प्रवक्ता ही नहीं बल्कि एक सफल लेखक भी थे। उन्हें अध्ययन का बेहद शौक था।
पुस्तक की उपादेयता दर्शाते हुए आचार्य महाप्रज्ञ ने कहा कि इस पुस्तक में प्रेरणा के बीज बोए हुए हैं। आचार्य महाश्रमण ने कहा कि सोहनलाल कोठारी तेरापंथ इतिहास के मर्मज्ञ व्यक्ति थे। साध्वी प्रमुखा महाश्रमणी कनकप्रभा ने कहा कि कोठारी का जीवन अनेक दृष्टियों से प्रेरणादायक रहा है।
कोठारी ने राजकीय सेवा करते हुए भी निरंतर साहित्य सृजन किया और इसके साथ-साथ समाज सेवा को समर्पित रहे। वे अनेक सम्मानों से सम्मानित किए गए। कोठारी ने साहित्य की विविध विधाओं के माध्यम से अपने ज्ञान को जनसाधारण तक पहुँचाने का प्रयास किया है। यह स्मृति अंक व्यक्तित्व, कृतित्व, दर्पण, उद्गार, सम्मान व संदेश—इन पाँच खंडों में विभाजित है, जिसमें कोठारी के व्यक्तित्व का सजीव चित्रण मिलता है।
संपादक रतनलाल शर्मा, जिनेन्द्र कोठारी, पुष्पराज कोठारी, जसराज चौपड़ा सहित सम्पूर्ण संपादक मंडल धन्यवाद व साधुवाद का पात्र है, जिन्होंने इस अनमोल स्मृति अंक स्मृति सुमन का उत्कृष्ट संपादन किया है।
सुनील कुमार माथुर
सदस्य अणुव्रत लेखक मंच, स्वतंत्र लेखक व पत्रकार, 33 वर्धमान नगर, शोभावतों की ढाणी, खेमे का कुआँ, पाल रोड, जोधपुर, राजस्थान








