समाज-संस्कृति : हंसी-मजाक का खेल नहीं है “शादी-विवाह”

समाज संस्कृति : हंसी मजाक का खेल नहीं है “शादी विवाह”, हिन्दू औरतों पर तलाक का कानून क्यों लागू है? शायद सरकार हिन्दुओं को मुसलमान बनाना चाहती है और इस बात की फ़िक्र किसी को नहीं है। # राजीव कुमार झा
यह बात सभी जानते कि तलाक इस्लाम का कानून है और अब हिंदू जो चंदन टीका माला गेरुआ धारण करते हैं, वह भी इसे मानते हैं लेकिन घर परिवार में स्त्री पुरुष के बीच पति पत्नी के बीच जो शास्त्रों का विधान है इसमें तलाक को मानना सबके लिए संभव नहीं है।
जो पुरुष स्त्रियों को पत्नी के रूप में छोड़ देते हैं उनमें परंपरा गत संस्कृति की औरतों के लिए फिर से विवाह रचाना संभव नहीं हो पाता। राजद नेता और नीतीश कुमार के मंत्रिमंडल में मंत्री तेजप्रताप यादव को यह बात कोई कैसे समझाए। तेजप्रताप यादव को अगर अपनी ऐश्वर्या के साथ नहीं रहना था और साधु जीवन बिताना था तो उन्हें शादी नहीं करना चाहिए था।
यह हंसी मजाक का खेल नहीं है। तेजप्रताप यादव को अपरिपक्व युवक के रूप में देखा जाता है। नीतीश कुमार और भाजपा गठबंधन के दौरान एक दिन बिना पूछे कुछ लोगों को लेकर वह विधानसभा में घुस गये थे। ऐश्वर्या उनके साथ रहना चाहती है लेकिन उन्हें उसके मनोभावों की कद्र नहीं है।
हिन्दू औरतों पर तलाक का कानून क्यों लागू है? शायद सरकार हिन्दुओं को मुसलमान बनाना चाहती है और इस बात की फ़िक्र किसी को नहीं है। तेजप्रताप को यत्र नार्यस्तु पूज्यंते वाली बात याद रखना चाहिए और अगर ऐश्वर्या उसके साथ में फिर रहने के लिए तैयार है तो तेजप्रताप यादव को उसे अपने घर में सादर बुलाकर रखना चाहिए।
इस बात पर तेजप्रताप को कोई भला बुरा नहीं कहेगा क्योंकि वह उसकी पत्नी है। मुसलमानों ने समाज में जिन कुप्रथाओं को शुरू किया उनमें तलाक भी है। बौद्धिक हलकों में इसे कुछ लोग पश्चिमी संस्कृति मानते हैं जो गलत क़िस्म की सोच है। हमारे देश में तलाक मुसलमान लेकर आये।
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