
उत्तरकाशी के राजकीय इंटर कॉलेज गेंवला ब्रहमखाल के दो छात्रों ने सड़क सुरक्षा के लिए स्मार्ट सेफ्टी डिवाइस तैयार की है। यह डिवाइस ड्राइविंग के दौरान नींद आने पर अलार्म बजाती है और शराब पीने पर वाहन स्टार्ट नहीं होने देती। राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में उनके मॉडलों को द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त हुआ।
- जीआईसी गेंवला ब्रहमखाल के छात्रों का कमाल, सड़क सुरक्षा के लिए तैयार किया मॉडल
- राष्ट्रीय प्रतियोगिता में उत्तरकाशी के विद्यार्थियों ने जीता द्वितीय व तृतीय स्थान
- सेंसर आधारित तकनीक से सड़क हादसों पर लगेगा अंकुश
- वैज्ञानिक सोच से छात्रों ने तैयार किए जीवन रक्षक उपकरण
उत्तरकाशी | उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित राजकीय इंटर कॉलेज गेंवला ब्रहमखाल के दो प्रतिभाशाली छात्रों ने सड़क सुरक्षा की दिशा में उल्लेखनीय पहल करते हुए आधुनिक तकनीक पर आधारित स्मार्ट सेफ्टी डिवाइस तैयार की है। इन छात्रों ने अपनी वैज्ञानिक सोच और नवाचार क्षमता का परिचय देते हुए ऐसे उपकरण विकसित किए हैं, जो नींद और शराब के कारण होने वाली सड़क दुर्घटनाओं को रोकने में सहायक हो सकते हैं। राष्ट्रीय स्तर की ऑनलाइन ‘क्षेत्रीय जिज्ञासा 2025-26’ प्रतियोगिता, जिसका आयोजन Samsung और Agastya International Foundation द्वारा किया गया, में विद्यालय की छात्रा प्रिया नेगी और छात्र अखिल राणा ने अपने-अपने मॉडल प्रस्तुत किए।
प्रतियोगिता में प्रिया नेगी ने द्वितीय तथा अखिल राणा ने तृतीय स्थान प्राप्त कर विद्यालय और जनपद का नाम रोशन किया। द्वितीय पुरस्कार विजेता प्रिया नेगी ने “स्लीपिंग कंट्रोल डिवाइस फॉर ड्राइविंग” मॉडल तैयार किया। यह डिवाइस विशेष सेंसर तकनीक पर आधारित है, जो वाहन चालक की आंखों की गतिविधि और चेहरे के भावों को पहचानकर नींद के संकेतों का पता लगाती है। जैसे ही चालक को झपकी आने लगती है या उसकी आंखें बार-बार बंद होती हैं, डिवाइस तुरंत तेज अलार्म बजाकर उसे सचेत कर देती है। लंबी दूरी की यात्रा या रात्रि ड्राइविंग के दौरान यह तकनीक संभावित दुर्घटनाओं को टालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
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वहीं तृतीय पुरस्कार प्राप्त करने वाले अखिल राणा ने “अल्कोहल कंट्रोल डिवाइस फॉर व्हीकल” विकसित किया। यह सेंसर आधारित सिस्टम चालक की सांस में मौजूद अल्कोहल की मात्रा को पहचानता है। यदि निर्धारित सीमा से अधिक शराब का सेवन पाया जाता है, तो यह डिवाइस वाहन के इंजन को स्टार्ट होने से रोक देता है। यदि वाहन पहले से चल रहा हो, तो यह उसे सुरक्षित रूप से नियंत्रित तरीके से बंद करने की प्रक्रिया शुरू कर सकता है। इस तकनीक का उद्देश्य शराब पीकर वाहन चलाने की प्रवृत्ति पर प्रभावी रोक लगाना है।
इन दोनों मॉडलों को विद्यालय के सहायक अध्यापक धनवीर शाह के मार्गदर्शन में तैयार किया गया। छात्रों ने सीमित संसाधनों के बावजूद नवाचार, तकनीकी समझ और सामाजिक जिम्मेदारी का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस प्रकार की तकनीकों को बड़े स्तर पर विकसित कर व्यावसायिक रूप दिया जाए, तो सड़क दुर्घटनाओं की संख्या में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। उत्तरकाशी के इन छात्रों का प्रयास न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि यह दर्शाता है कि ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थी भी वैज्ञानिक नवाचार में अग्रणी भूमिका निभा सकते हैं।





