
यह कविता शीतला माता के प्रति श्रद्धा और आस्था को व्यक्त करती है। शीतला सप्तमी और अष्टमी के व्रत, पूजा और परंपराओं के माध्यम से रोगों से मुक्ति तथा परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।
- शीतला माता की महिमा
- आस्था और परंपरा का पर्व शीतला अष्टमी
- रोगों से रक्षा की प्रतीक शीतला माता
- श्रद्धा से पूजित शीतला माता
सैनिक की कलम
गणपत लाल उदय, अजमेर (राजस्थान)
जय जय जय देवी शीतला हमारी माता,
यह पर्व होली के सात दिनों बाद आता।
आदि ज्योति रानी, आशीर्वाद रहें हमेशा,
बासी भोजन भोग मैया आपको भाता।।
इस दिन महिलाएँ सभी उपवास रखतीं,
चूल्हा जलाकर गर्म खाना नहीं पकातीं।
बासी खाना मैय्या को अर्पित वो करतीं,
परिवार में सुख-समृद्धि की कामना करतीं।।
शीतला सप्तमी और यह अष्टमी का व्रत,
बहुत सारे रोगों से करता सब को मुक्त।
चैत्र माह की कृष्णपक्ष अष्टमी में आता,
बुखार, ख़सरा, चेचक रोग आने न देता।।
श्रद्धापूर्वक पूजन माँ का जो भी करता,
धन-धान्य की कमी उसके घर न आता।
संपूर्ण उत्तर भारत आपकी गाथा गाता,
ब्रह्मदेव से हुआ आपकी उत्पत्ति, माता।।
लाखों लोग मानते हैं मैया को कुलदेवी,
गर्दभ की करती आप शानदार सवारी।
ज्वरासुर, ज्वर, हैजे, चौसठ रोग की देवी,
लगते हैं मेले और निकालते हैं बिंदोरी।।








