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शारदीय नवरात्र और देवी दुर्गा की उपासना… दुर्गा सप्तशती का पाठ इस दौरान किया जाता है। यह शाक्त संप्रदाय का प्रमुख ग्रंथ है। इसमें नारी शक्ति की महिमा का सुंदर वर्णन इसके विविध उपाख्यानों में है। विजयादशमी के दिन देवी दुर्गा की प्रतिमा और उनके मंदिरों में धार्मिक अज्ञान के कारण पशु बलि की कुप्रथा का भी प्रचलन है। #राजीव कुमार झा
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शरद ऋतु को वसंत की तरह से सुंदर ऋतु कहा जाता है। वर्षा ऋतु के बाद शरद का आगमन जब होता है तो सर्वत्र प्रकृति में आकंठ सुख सुषमा दिखाई देती है। आकाश में थोड़े बहुत बादल शेष बचे रहते हैं और नदी ताल तलैयों में स्निग्ध जल सबको स्नान ध्यान पूजा पाठ के पावन भावों की प्रेरणा देता है।
शरद का आगमन मनुष्य को धर्म अध्यात्म की चेतना प्रदान करता है और इसी ऋतु में पौराणिक कथा के अनुसार राम ने लंका में रावण से युद्ध करके उस पर विजय प्राप्त की थी। दुर्गा पूजा का त्योहार शरद ऋतु में इसी खुशी में मनाया जाता है। रामायण में कथा है कि जब राम रावण के साथ अपने कठिन युद्ध में अपार विघ्न बाधाओं का सामना कर रहे थे तो उन्होंने देवी दुर्गा के ध्यान और उनके पूजन से विजय का वरदान पाया था.
रावण का वध उन्होंने किया था। दुर्गा पूजा को विजयादशमी और दशहरा भी कहा जाता है। यह त्योहार सबको जीवन में अधर्म अत्याचार पाप और से संघर्ष की प्रेरणा देता है। इसे आसुरी शक्ति पर देवी शक्ति की विजय का उत्सव कहा जाता है। दुर्गा पूजा में नवरात्र का उत्सव प्रसिद्ध है। हिन्दू मतावलंबी विजयादशमी से पहले नौ दिनों तक देवी दुर्गा की विशेष उपासना करते हैं.
दुर्गा सप्तशती का पाठ इस दौरान किया जाता है। यह शाक्त संप्रदाय का प्रमुख ग्रंथ है। इसमें नारी शक्ति की महिमा का सुंदर वर्णन इसके विविध उपाख्यानों में है। विजयादशमी के दिन देवी दुर्गा की प्रतिमा और उनके मंदिरों में धार्मिक अज्ञान के कारण पशु बलि की कुप्रथा का भी प्रचलन है।








