
हल्द्वानी (नैनीताल)। उत्तराखंड के नैनीताल जिले के हल्द्वानी शहर में एक नाबालिग छात्रा से छेड़छाड़ और उसके बाद अपहरण का गंभीर मामला सामने आया है। आरोपी युवक कई दिनों से छात्रा का पीछा कर उसे परेशान कर रहा था। जब छात्रा के पिता ने आरोपी के घर जाकर विरोध किया तो वह अपने साथी के साथ मिलकर छात्रा का अपहरण कर ले गया। घटना से इलाके में सनसनी फैल गई है और परिजनों में भय का माहौल है।
घटना कैसे हुई
- पीड़ित परिवार नैनीताल रोड स्थित एक कॉलोनी में रहता है।
- 15 वर्षीय पीड़िता कक्षा 10 की छात्रा है और रोजाना शाम को ट्यूशन पढ़ने जाती है।
- छात्रा के पिता ने पुलिस को बताया कि सुहेल नामक युवक कई दिनों से उनकी बेटी के साथ छेड़छाड़ करता आ रहा था।
- बेटी ने जब यह बात घरवालों को बताई तो पिता ने सीधे आरोपी के घर जाकर उसका विरोध किया और उसे समझाने की कोशिश की।
अपहरण की वारदात
- घटना 30 अगस्त की शाम की है।
- छात्रा रोजाना की तरह ट्यूशन के लिए घर से निकली थी।
- इसी दौरान आरोपी सुहेल अपने एक साथी के साथ स्कूटी पर आया और उसने जबरदस्ती छात्रा का हाथ पकड़कर उसे स्कूटी पर बैठा लिया।
- दोनों छात्रा को जबरन लेकर फरार हो गए।
परिवार को जब घटना की जानकारी मिली तो उन्होंने तुरंत बेटी की तलाश शुरू की। कुछ ही देर बाद आरोपी छात्रा को नैनीताल रोड के पास छोड़कर भाग गया।
धमकी देकर छोड़ा
छात्रा ने परिजनों को बताया कि आरोपी ने उसे धमकी दी कि यदि उसने इस घटना के बारे में किसी को बताया तो वह उसे जान से मार देगा। इससे छात्रा और परिवार दोनों डरे हुए हैं।
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पुलिस की कार्रवाई
- पीड़ित परिवार ने तुरंत पुलिस से संपर्क किया।
- हल्द्वानी कोतवाल राजेश यादव ने बताया कि आरोपी सुहेल और उसके साथी के खिलाफ छेड़छाड़, अपहरण और जान से मारने की धमकी देने की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
- पुलिस ने आरोपी की तलाश शुरू कर दी है और दावा किया कि उसे जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
सामाजिक पहलू और चिंता
यह घटना एक बार फिर से इस गंभीर सवाल को उठाती है कि
- नाबालिग छात्राओं की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए?
- मनचलों पर समय रहते सख्त कार्रवाई क्यों नहीं होती?
- परिवारों को अपनी बेटियों की सुरक्षा के लिए बार-बार इस तरह की मानसिक पीड़ा क्यों सहनी पड़ती है?
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पुलिस ने पहले ही आरोपी पर नजर रखी होती और उसे चेतावनी या कानूनी कार्रवाई की जाती, तो अपहरण जैसी घटना टाली जा सकती थी।






