
लोकसभा सांसद सायनी घोष ने केंद्र सरकार की नीतियों, बजट और रोजगार के मुद्दे पर तीखा हमला बोला। उन्होंने शासन व्यवस्था और प्रधानमंत्री की विदेश व घरेलू यात्राओं के परिणामों पर सवाल उठाए। भाजपा समर्थकों ने इन आरोपों को राजनीतिक बयानबाजी बताया, जिससे सियासी चर्चा तेज हो गई है।
- केंद्र की नीतियों पर सायनी घोष की तीखी टिप्पणी
- बजट, बचत और बेरोजगारी पर विपक्ष का हमला
- प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं पर मांगा हिसाब
- शासन बनाम विकास पर सियासी बहस तेज
राज शेखर भट्ट
लोकसभा सांसद सायनी घोष ने मीडिया से बातचीत के दौरान केंद्र सरकार की नीतियों और कार्यशैली पर कड़ी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि देश में विकास, रोजगार और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर कई गंभीर चुनौतियां मौजूद हैं, जिन पर प्रभावी ढंग से काम करने की आवश्यकता है। सायनी घोष ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार को घेरते हुए कहा कि “नए भारत में गवर्नमेंट तो है, लेकिन गवर्नेंस नहीं है। बजट है, लेकिन बचत नहीं है। खर्च है, पर रोजगार नहीं है।”
Government Advertisement...
उन्होंने आरोप लगाया कि आम जनता को आर्थिक राहत और रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं मिल पा रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री की विदेश और घरेलू यात्राओं का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2022 से अब तक कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू दौरों के बावजूद आम लोगों को ठोस लाभ क्या मिला, इस पर स्पष्ट जवाब दिया जाना चाहिए। उनके अनुसार सरकार को यात्राओं और नीतिगत फैसलों के परिणामों का ब्यौरा जनता के सामने रखना चाहिए।
राजनीतिक तुलना करते हुए सायनी घोष ने ममता बनर्जी के नेतृत्व की प्रशंसा की और कहा कि भाजपा एक “कटी पतंग” की तरह है, जबकि ममता बनर्जी “पूरा आसमान” हैं। इस बयान को पश्चिम बंगाल की राजनीति के संदर्भ में देखा जा रहा है, जहां सत्तारूढ़ दल और भाजपा के बीच लगातार राजनीतिक प्रतिस्पर्धा बनी हुई है। सायनी घोष के इन बयानों के बाद राजनीतिक माहौल में बहस तेज हो गई है। विपक्षी दल इसे शासन, आर्थिक नीति और रोजगार जैसे अहम मुद्दों पर गंभीर प्रश्न बता रहे हैं।
वहीं भारतीय जनता पार्टी के समर्थकों का कहना है कि यह बयान केवल राजनीतिक बयानबाजी है और केंद्र सरकार ने विकास, बुनियादी ढांचे और कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से व्यापक काम किया है। विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद केवल आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शासन मॉडल, विकास की परिभाषा और राजनीतिक विमर्श की दिशा पर व्यापक बहस को जन्म दे रहा है। आने वाले समय में इस मुद्दे पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।








1 thought on “सायनी घोष का मोदी सरकार पर हमला, शासन और रोजगार पर उठाए सवाल”