
यह रचना बाल जगत के माध्यम से जीवन के मानवीय गुणों को पारिवारिक रिश्तों से जोड़कर प्रस्तुत करती है। संयम, त्याग, दया, ममता और सेवा जैसे गुणों को परिवार के सदस्यों के रूप में दिखाकर बच्चों को सरल और संस्कारित संदेश दिया गया है।
- बाल जगत की सीख
- जीवन के रिश्ते
- संस्कारों का परिवार
- गुणों से बना संसार
सुनील कुमार माथुर
संयम ही जीवन है
त्याग पिता है
सहनशीलता माँ है
तपस्या बहन है
परोपकार भाई है
ज्ञान दादाजी है
निष्ठा दादीजी है
दया नाना है
ममता नानी है
सेवा चाचा है
समर्पण चाची है
सुनील कुमार माथुर
सदस्य — अणुव्रत लेखक मंच, (स्वतंत्र लेखक व पत्रकार) जोधपुर, राजस्थान






