
यह आलेख संत वैलेंटाइन के ऐतिहासिक जीवन, उनकी शहादत और वैलेंटाइन डे की उत्पत्ति की पृष्ठभूमि को प्रस्तुत करता है। इसमें प्रेम के इस पर्व के धार्मिक, ऐतिहासिक और आधुनिक सामाजिक स्वरूप का विश्लेषण किया गया है। लेख प्रेम, सौहार्द और मानवीय जुड़ाव के मूल संदेश को रेखांकित करता है।
- वैलेंटाइन डे का इतिहास और संत वैलेंटाइन का बलिदान
- प्रेम का पर्व: इतिहास से आधुनिकता तक वैलेंटाइन डे
- रोम से दुनिया तक वैलेंटाइन की विरासत
- संत वैलेंटाइन और प्रेम का वैश्विक उत्सव
सत्येन्द्र कुमार पाठक
फरवरी का महीना आते ही फिजाओं में एक खास किस्म की गर्माहट महसूस होने लगती है। बाजारों में लाल गुलाबों की बाढ़ आ जाती है और ग्रीटिंग कार्ड्स के जरिए दिल की बात कहने का दौर शुरू होता है। आज के दौर में ‘वैलेंटाइन डे’ एक वैश्विक उत्सव बन चुका है, लेकिन इसके पीछे की कहानी बलिदान, कठोर राजशाही के खिलाफ विद्रोह और एक गहरे आध्यात्मिक इतिहास से जुड़ी है। यह केवल एक ‘रोमांटिक’ दिन नहीं है, बल्कि यह एक पादरी की शहादत की याद है जिसने प्रेम को कानून से ऊपर रखा। वैलेंटाइन डे की जड़ें खोजने पर हमें तीसरी शताब्दी के रोम में जाना पड़ता है। ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार, ‘वैलेंटाइन’ नाम के दो या तीन संतों का जिक्र मिलता है, जिनके जीवन की घटनाएँ आपस में इस कदर मिल गई हैं कि आज उन्हें एक ही नाम से जाना जाता है।
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रोम के संत वैलेंटाइन एक पादरी थे, जिन्हें लगभग 269 ईसवी (AD) में शहादत मिली। उन्हें रोम के ‘वाया फ्लेमिनिया’ में दफनाया गया था। उनके अवशेष आज भी रोम के सेंट प्राक्स्ड चर्च और आयरलैंड के डब्लिन स्थित व्हाइटफ्रियर स्ट्रीट कार्मेलाइट चर्च में संरक्षित हैं। दूसरी ओर, टेरनी के वैलेंटाइन का भी जिक्र आता है, जो 197 ईसवी में ‘इन्तेरामना’ (आधुनिक टेरनी) के बिशप बने। उन्हें सम्राट औरेलियन के शासनकाल में ईसाई उत्पीड़न के दौरान शहीद किया गया था। यद्यपि इन्हें भी वाया फ्लेमिनिया में ही दफनाया गया, लेकिन उनकी कब्र का स्थान अलग था। 1969 तक कैथोलिक चर्च ने ऐसे 11 ‘वैलेंटाइन’ दिनों को मान्यता दी थी, जिनके नाम पर 14 फरवरी को यह पर्व मनाया जाता है।
वैलेंटाइन को प्रेम से जोड़ने वाली सबसे प्रसिद्ध कहानी सम्राट क्लोडियस द्वितीय के काल की है। सम्राट का मानना था कि विवाहित पुरुष अच्छे सैनिक साबित नहीं होते, क्योंकि युद्ध के मैदान में उन्हें अपने परिवार की चिंता सताती है। इस सोच के साथ उसने सैनिकों की शादी पर प्रतिबंध लगा दिया। पादरी वैलेंटाइन ने इस क्रूर नियम को मानने से इनकार कर दिया। उन्होंने गुप्त रूप से युवा प्रेमियों की शादियाँ करवानी शुरू कर दीं। जब सम्राट को इस ‘विद्रोह’ का पता चला, तो वैलेंटाइन को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया गया। जेल में रहते हुए उन्होंने एक चमत्कार किया—उन्होंने जेलर की अंधी बेटी की आँखों की रोशनी अपनी प्रार्थना से वापस लौटा दी। अपनी मृत्यु से ठीक पहले, उन्होंने उस लड़की को एक पत्र लिखा, जिसके अंत में उन्होंने हस्ताक्षर किए—“तुम्हारा वैलेंटाइन” (From your Valentine)। यह दुनिया का पहला ‘वैलेंटाइन संदेश’ माना जाता है।
चौदहवीं सदी और रूमानी प्रेम का उदय – शुरुआती मध्यकालीन ईसाई अभिलेखों में प्रेम का कोई जिक्र नहीं था। संत वैलेंटाइन को ‘मिर्गी के रोगियों के संरक्षक संत’ के रूप में भी जाना जाता था। लेकिन 14वीं शताब्दी के महान कवि जेफ्री चौसर के समय के आसपास, इस दिन का संबंध पक्षियों के जोड़े बनाने और इंसानी प्रेम से जुड़ने लगा। धीरे-धीरे रोम के वैलेंटाइन और टेरनी के वैलेंटाइन के बीच का अंतर खत्म हो गया और वे ‘प्रेम के संत’ बन गए।
आधुनिक उत्सव: 7 से 14 फरवरी का ‘वैलेंटाइन वीक’ – आज के उपभोक्तावादी युग में, वैलेंटाइन डे केवल 14 फरवरी तक सीमित नहीं है। अब यह आठ दिनों के एक लंबे उत्सव में बदल गया है, जिसे ‘वैलेंटाइन वीक’ कहा जाता है:
- 7 फरवरी (रोज डे): यह भावनाओं के इजहार का पहला कदम है। लाल गुलाब प्रेम का, पीला दोस्ती का और सफेद शांति का संदेश देता है।
- 8 फरवरी (प्रपोज डे): यह दिन अपनी भावनाओं को शब्दों में ढालकर साथी के सामने रखने का है।
- 9 फरवरी (चॉकलेट डे): रिश्तों में मिठास घोलने का दिन। वैज्ञानिक रूप से भी चॉकलेट ‘फील गुड’ हार्मोन्स रिलीज करती है।
- 10 फरवरी (टेडी डे): यह मासूमियत और कोमल भावनाओं का प्रतीक है।
- 11 फरवरी (प्रॉमिस डे): यह दिन प्रेम की नींव यानी ‘विश्वास’ को मजबूत करने का है।
- 12 फरवरी (हग डे): एक आलिंगन जो बिना कुछ कहे सुरक्षा और अपनेपन का एहसास कराता है।
- 13 फरवरी (किस डे): यह दिन प्रेम में शारीरिक और आत्मिक जुड़ाव का प्रतीक है।
- 14 फरवरी (वैलेंटाइन डे): वह मुख्य दिन जब पूरी दुनिया में उपहारों और संदेशों के जरिए प्रेम का जश्न मनाया जाता है।
वैलेंटाइन डे आज एक बड़ा व्यापारिक अवसर भी है। अमेरिका के ग्रीटिंग कार्ड एसोसिएशन के अनुसार दुनिया भर में हर साल लगभग 1 अरब कार्ड भेजे जाते हैं। क्रिसमस के बाद यह साल का दूसरा सबसे बड़ा कार्ड भेजने वाला त्योहार है। 1847 में एस्थर हौलैंड ने अमेरिका में हाथ से बने कार्ड्स का व्यावसायिक उत्पादन शुरू किया, जिसने इसे घर-घर पहुँचा दिया। पुरुष अक्सर महिलाओं की तुलना में इस दिन दोगुना खर्च करते हैं, जिसमें हीरे, घड़ियाँ और महंगे डिनर शामिल हैं।
प्रेम का यह उत्सव केवल पाश्चात्य संस्कृति तक सीमित नहीं है। प्राचीन फारस (ईरान) में वैलेंटाइन डे से बहुत पहले से ही प्रेमियों का उत्सव मनाया जाता रहा है। माल्टा जैसे देशों में आज भी पारंपरिक कैथोलिक रीति-रिवाजों से संत वैलेंटाइन का स्मरण किया जाता है। वैलेंटाइन डे के प्रतीकों में ‘हार्ट शेप’ (दिल का आकार), सफेद कबूतर और पंखों वाला क्यूपिड (प्रेम का देवता) शामिल हैं। ये प्रतीक सदियों से कला और साहित्य में प्रेम की अभिव्यक्ति के माध्यम रहे हैं।
वैलेंटाइन डे केवल फूलों और उपहारों का लेन-देन नहीं है, बल्कि यह उस जज़्बे का सम्मान है जिसने नफरत और पाबंदियों के दौर में प्रेम को जिंदा रखा। संत वैलेंटाइन की शहादत हमें याद दिलाती है कि प्रेम एक ऐसा शक्तिशाली भाव है जो सीमाओं, कानूनों और यहाँ तक कि मृत्यु से भी ऊपर है। चाहे आप इसे धार्मिक श्रद्धा से मनाएँ या आधुनिक तरीके से, इसका मूल संदेश एक ही है—सौहार्द और मानवीय जुड़ाव।






