
यह कविता बढ़ते साइबर अपराधों और ठगों के विभिन्न हथकंडों को सरल भाषा में उजागर करती है। साथ ही, पाठकों को सतर्क रहने, बैंक विवरण साझा न करने और किसी भी डिजिटल प्रलोभन से बचने की प्रेरणा देती है।
- डिजिटल दुनिया में ठगी का जाल
- मोबाइल और इंटरनेट पर बढ़ता खतरा
- सावधानी ही साइबर अपराध से सुरक्षा
- ठगों से बचाव का संदेश
गणपत लाल उदय
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आज बढ़ रहा है तीव्रता से साइबर ठगों का आतंक,
अपने-आप को समझ रहे हैं वे सभी से बड़े दबंग।
फैला रहे हैं जो जाल धन-धान्य, ऐसे अनेकों हैं शैतान,
जाल, झूठ, छल-कपट, हेराफेरी से कर देते हैं दंग।।
करते हैं मोबाइल सिम बदलकर, फोन से ये बात,
फोन मिलाकर कहते मित्रवर, क्या है आपका हाल।
वॉइस ऐप से निकाल लेते जो हू-ब-हू वैसी आवाज़,
पूछते-पूछते हालचाल, वे करने लग जाते सवाल।।
कैसे, कहाँ हो आजकल, थोड़ा करना यार मेरी मदद,
रुपयों की हमें है सख्त ज़रूरत, मना करना तू मत।
रिश्तेदार बनकर भी कहते, एक्सीडेंट का लेते नाम,
फँसा लेते हैं वे जाल में, फोन-पे कर दो इसी वक्त।।
यही नहीं है, आज हो रहा हेलो-हाय फोन पर चैटिंग,
लड़की बनकर ये बात करेंगे, कर लो हमसे सैटिंग।
वीडियो कॉल से बीएफ मूवी बनाकर करते हैं परेशान,
वायरल करने का कहकर, ये पैसों की करते माँग।।
कोई नहीं हड़बड़ाना दोस्तों, इनके झाँसे में न आना,
होते हैं वे तेज-तर्रार, पहले सब तहकीकात करना।
नहीं बताना कभी बैंक डिटेल, न पासवर्ड ये बताना,
मेरा काम है रचनाएँ लिखना, ठीक लगे वो करना।।
सैनिक की क़लम
गणपत लाल उदय, अजमेर, राजस्थान









