
अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर नेपाल की राजधानी में आयोजित भव्य समारोह में बिहार के सीवान निवासी साहित्यकार रूपेश कुमार को ‘मातृभाषा रत्न’ अंतरराष्ट्रीय मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। यह सम्मान नेपाल की प्रतिष्ठित संस्था द्वारा हिंदी-नेपाली भाषाई मैत्री, देवनागरी लिपि संरक्षण और साहित्यिक योगदान के लिए प्रदान किया गया। कार्यक्रम में पाँच देशों की लगभग एक हजार प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया।
- नेपाल में बिहार के साहित्यकार रूपेश कुमार को अंतरराष्ट्रीय उपाधि
- ‘मातृभाषा रत्न’ से अलंकृत हुए चैनपुर के रूपेश कुमार
- नेपाल-भारत मैत्री समारोह में रूपेश कुमार को वैश्विक सम्मान
- देवनागरी और मातृभाषा संरक्षण में योगदान पर रूपेश का सम्मान
नेपाल/नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस (21 फरवरी 2026) के अवसर पर नेपाल की राजधानी काठमांडू में आयोजित एक गरिमामय अंतरराष्ट्रीय समारोह में बिहार के सीवान ज़िले के चैनपुर गाँव निवासी साहित्यकार रूपेश कुमार को ‘मातृभाषा रत्न’ अंतरराष्ट्रीय मानद उपाधि से सम्मानित किया गया।
यह सम्मान नेपाल की प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्था शब्द प्रतिभा बहुक्षेत्रीय सम्मान फाउंडेशन नेपाल द्वारा प्रदान किया गया। समारोह का मुख्य उद्देश्य नेपाल-भारत मैत्री संबंधों को सुदृढ़ करना, देवनागरी लिपि का संरक्षण एवं संवर्धन करना तथा हिंदी-नेपाली जैसी मैत्री भाषाओं को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देना रहा।
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कार्यक्रम में नेपाल और भारत सहित पाँच देशों की लगभग एक हजार साहित्यिक, शैक्षिक एवं सांस्कृतिक प्रतिभाओं को ‘मातृभाषा रत्न’ एवं ‘मातृभाषा गौरव’ सम्मान से अलंकृत किया गया। रूपेश कुमार को उनके उल्लेखनीय साहित्यिक, शैक्षिक एवं सामाजिक योगदान के लिए संस्था के अध्यक्ष आनन्द गिरी मायालु एवं चयन समिति प्रमुख मंजू खरे द्वारा प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
रूपेश कुमार, सीवान (बिहार) के चर्चित साहित्यकार, समाजसेवी, शिक्षक और साहित्यिक संपादक के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं। उनकी पाँच एकल काव्य कृतियाँ प्रकाशित हो चुकी हैं तथा वे पाँच पुस्तकों का संपादन भी कर चुके हैं। वे विभिन्न साहित्यिक एवं सामाजिक संस्थाओं से सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं और इससे पूर्व भी अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित हो चुके हैं।
समारोह के दौरान अध्यक्ष आनन्द गिरी मायालु ने कहा कि फाउंडेशन का उद्देश्य प्रतिभाशाली रचनाकारों को अंतरराष्ट्रीय मंच प्रदान कर उनमें नई ऊर्जा और प्रेरणा का संचार करना है। रूपेश कुमार को इस सम्मान की सूचना मिलते ही साहित्यिक जगत में हर्ष का वातावरण है। उनके शुभचिंतकों, मित्रों और साहित्यप्रेमियों ने उन्हें हार्दिक बधाइयाँ एवं शुभकामनाएँ प्रेषित की हैं।







